पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को मतदाता सूची (Voter List) से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप में नोटिस जारी किया है। आयोग ने प्रशांत किशोर से जवाब मांगा है कि आखिर उनकी पार्टी ने किन आधारों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा किया और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कुछ दिन पहले प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बिहार की मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इलाकों में मृत लोगों के नाम सूची में हैं, जबकि कई नए मतदाताओं के नाम जोड़े नहीं गए हैं। इस बयान के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने कहा है कि इस तरह के आरोप बिना साक्ष्य के लगाए जाने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। इसलिए प्रशांत किशोर को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया है।
प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा है कि वे सभी सबूत आयोग को सौंपने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा,
“जनसुराज अभियान के दौरान हमें कई जिलों में मतदाता सूची में गड़बड़ी के प्रमाण मिले हैं। हमारा उद्देश्य चुनाव आयोग को इन खामियों से अवगत कराना था, न कि किसी संस्था की छवि धूमिल करना।”
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का मकसद बिहार में स्वच्छ राजनीति और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
चुनाव आयोग की दलील
चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई पार्टी या व्यक्ति मतदाता सूची में अनियमितता का आरोप लगाता है, तो उसे अपने दावे के ठोस दस्तावेज या प्रमाण पेश करने होंगे। आयोग का कहना है कि बिना प्रमाण आरोप लगाना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है।
इसके साथ ही आयोग ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे सभी जिलों में मतदाता सूची की समीक्षा करें ताकि अगर किसी तरह की गड़बड़ी हो, तो उसे सुधारा जा सके।
विपक्ष और सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया
इस मामले पर बिहार की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है।
राजद (RJD) ने चुनाव आयोग के कदम को “राजनीतिक दबाव” बताया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा,
“जब कोई सच्चाई सामने लाता है, तो सत्ता पक्ष घबरा जाता है। प्रशांत किशोर ने जो कहा, वह जमीनी हकीकत है।”
वहीं, भाजपा (BJP) ने प्रशांत किशोर पर पलटवार करते हुए कहा है कि वे खुद को चर्चाओं में बनाए रखने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है।
जनसुराज अभियान और प्रशांत किशोर की भूमिका
प्रशांत किशोर पिछले एक साल से अपने ‘जनसुराज यात्रा’ के जरिए बिहार के हर जिले में जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। वे लगातार मौजूदा राजनीतिक पार्टियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
जनसुराज पार्टी का दावा है कि वे सत्ता परिवर्तन से ज्यादा सिस्टम परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस अभियान के जरिये उन्होंने हजारों लोगों से सीधा संपर्क किया है।
चुनाव आयोग की सख्ती का संकेत
बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में आयोग नहीं चाहता कि किसी भी तरह के गलत बयान या अफवाह से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो। आयोग का यह कदम साफ संकेत है कि वह फर्जी दावों और अपुष्ट आरोपों पर सख्त कार्रवाई करेगा।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं रहेगा। यदि प्रशांत किशोर अपने दावों के पुख्ता सबूत पेश करते हैं, तो चुनाव आयोग को मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करनी पड़ सकती है।
अन्यथा, यह जनसुराज पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
अब सबकी निगाहें प्रशांत किशोर के जवाब पर हैं। वे आयोग को क्या जवाब देते हैं और उनके पास क्या प्रमाण हैं, इस पर अगले कदम निर्भर करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला बिहार चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे “चुनाव में पारदर्शिता” के मुद्दे से जोड़ सकता है।
बिहार की राजनीति में हर चुनाव से पहले मतदाता सूची, बूथ प्रबंधन और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इस बार प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकार द्वारा उठाया गया मुद्दा सीधे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जुड़ गया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आयोग और प्रशांत किशोर के बीच यह मामला किस दिशा में बढ़ता है।

