देवघर।
वसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रवाह संस्था द्वारा सोनारायथारी प्रखंड में ‘प्रकृति नमन दिवस’ बड़े ही उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। यह आयोजन प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति समाज में चेतना जागृत करने के उद्देश्य से किया गया। प्रवाह संस्था विगत तीन वर्षों से लगातार वसंत पंचमी के दिन इस विशेष दिवस का आयोजन कर रही है।
वसंत पंचमी का पर्व जहां एक ओर ज्ञान, विद्या और नई ऊर्जा का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर ऋतुओं के राजा वसंत के आगमन के साथ प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए प्रवाह संस्था ने इस दिन को ‘प्रकृति नमन दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की है।

प्रकृति संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रकृति में उपलब्ध संसाधनों जैसे मिट्टी, जल, वायु और जंगल के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है। संस्था का मानना है कि यदि समय रहते इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में मानव जीवन गंभीर संकट में पड़ सकता है।
इस अवसर पर प्रवाह संस्था के सचिव श्री दिलीप कुमार ने कहा कि
“प्रकृति के हैं तीन उपकार – मिट्टी, पानी और व्यार। मिट्टी, पानी और व्यार, ये हैं जीवन के आधार।”
उन्होंने कहा कि मानव जीवन की कल्पना शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और उपजाऊ मिट्टी के बिना संभव नहीं है। आज बढ़ते प्रदूषण, अंधाधुंध पेड़ कटाई और रासायनिक खेती के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

वैश्विक पर्यावरणीय आपदाओं से बचाव की पहल
प्रवाह संस्था का मानना है कि छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास ही वैश्विक पर्यावरणीय आपदाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।
श्री दिलीप कुमार ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएं और उनका संरक्षण करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने घर या खेत में एक भी पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
जैविक और प्राकृतिक खेती पर जोर
कार्यक्रम के दौरान जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रही है और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
प्रवाह संस्था ने किसानों से आग्रह किया कि वे धीरे-धीरे जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें, जिससे न केवल मिट्टी और जल संरक्षित रहेगा, बल्कि लोगों को भी स्वास्थ्यवर्धक और जहर-मुक्त भोजन मिल सकेगा।

गांवों से उमड़ा उत्साह
इस कार्यक्रम में सोनारायथारी प्रखंड के पांच गांवों से आए किसान बंधुओं, महिलाओं और प्रवाह संस्था की टीम ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में इस दिशा में और बेहतर काम करने का संकल्प लिया।
महिलाओं ने भी पौधारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि घर से ही बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया जाए, तो आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनेगी।
समाज के लिए प्रेरणा
‘प्रकृति नमन दिवस’ केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा है कि हम प्रकृति से केवल लेते ही न रहें, बल्कि उसे लौटाने और संवारने का भी प्रयास करें। प्रवाह संस्था का यह प्रयास स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली और यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने स्तर पर प्रकृति की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

