By: Vikash Kumar (Vicky)
पुरी ,ओडिशा के पवित्र तीर्थ नगरी पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आज 5 मार्च को एक अत्यंत विशेष और गुप्त धार्मिक अनुष्ठान ‘बनकलगी’ के आयोजन के कारण मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए करीब चार घंटे तक बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के श्रीविग्रहों का विशेष ‘श्रीमुख श्रृंगार’ किया जाएगा। यह अनुष्ठान जगन्नाथ मंदिर की प्राचीन परंपराओं में से एक माना जाता है और इसे अत्यंत गोपनीय ढंग से संपन्न कराया जाता है। इस वजह से आम भक्तों के दर्शन कुछ समय के लिए रोक दिए जाते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह निर्धारित समय से लेकर लगभग चार घंटे तक मंदिर के गर्भगृह में केवल पुजारी और सेवायत ही मौजूद रहेंगे।

क्या है बनकलगी अनुष्ठान
‘बनकलगी’ भगवान जगन्नाथ मंदिर का एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें भगवान के श्रीविग्रहों के मुखमंडल पर प्राकृतिक रंगों और औषधीय पदार्थों से विशेष लेप और श्रृंगार किया जाता है। इस प्रक्रिया को ‘श्रीमुख श्रृंगार’ भी कहा जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के दौरान भगवान के मुखमंडल को नए सिरे से सजाया जाता है, जिससे उनकी दिव्यता और आभा और अधिक प्रकट होती है। इस दौरान विशेष प्रकार के प्राकृतिक रंगों, चंदन और औषधीय तत्वों का उपयोग किया जाता है। यह कार्य मंदिर के विशेष सेवायतों द्वारा ही किया जाता है, जिन्हें इस परंपरा को निभाने का अधिकार प्राप्त है।

इसलिए रखा जाता है अनुष्ठान गोपनीय
जगन्नाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार बनकलगी अनुष्ठान अत्यंत गोपनीय होता है। इसके दौरान गर्भगृह के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और केवल सीमित संख्या में सेवायत ही अंदर प्रवेश कर सकते हैं। इसका उद्देश्य धार्मिक विधि-विधान को पूरी शुद्धता और परंपरा के साथ संपन्न करना होता है। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह अनुष्ठान भगवान के दिव्य स्वरूप को सुरक्षित रखने और उनकी पवित्रता को बनाए रखने की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। इसलिए इस दौरान बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह निषिद्ध रहता है।

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस दौरान धैर्य रखें और निर्धारित समय के बाद ही दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। चार घंटे के इस अनुष्ठान के बाद मंदिर के द्वार फिर से भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे और सामान्य दर्शन व्यवस्था बहाल हो जाएगी। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और अनुष्ठानों के दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा समय-समय पर इस तरह की व्यवस्था की जाती है ताकि धार्मिक परंपराओं का पालन भी हो सके और श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहे।

जगन्नाथ मंदिर का धार्मिक महत्व
पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र मंदिरों में से एक है। यह मंदिर चार धामों में शामिल है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और उनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। मंदिर की परंपराएं और अनुष्ठान सदियों पुराने हैं और इन्हें आज भी उसी विधि-विधान के साथ निभाया जाता है। बनकलगी जैसे अनुष्ठान इस मंदिर की समृद्ध धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं, जो इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाते हैं।

भक्तों के लिए विशेष जानकारी
मंदिर प्रशासन के अनुसार बनकलगी अनुष्ठान के दौरान दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे, लेकिन इसके बाद मंदिर में सामान्य दर्शन की व्यवस्था फिर से शुरू कर दी जाएगी। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे मंदिर प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अनुष्ठान भगवान और भक्तों के बीच आध्यात्मिक संबंध को और मजबूत करते हैं। यही कारण है कि जगन्नाथ मंदिर की परंपराएं आज भी उतनी ही श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाई जाती हैं जितनी सदियों पहले निभाई जाती थीं।

