By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत 25 कांग्रेसी सांसदों को गोली मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और राजस्थान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोटा से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी से धमकी से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, यह धमकी सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए दी गई थी। संदेश में कांग्रेस सांसदों को निशाना बनाते हुए गोली मारने की चेतावनी दी गई थी। मामला सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित साइबर सेल को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

राहुल गांधी, जो वर्तमान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद हैं, पहले भी कई बार राजनीतिक बयानबाजी और विवादों के केंद्र में रहे हैं। हालांकि इस बार मामला सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ गई है। संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की पहचान तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए की गई। लोकेशन ट्रेस होने के बाद कोटा में छापेमारी कर उसे हिरासत में लिया गया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने यह धमकी किस उद्देश्य से दी और क्या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं।
पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साइबर अपराध और आपराधिक धमकी से जुड़े प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि धमकी में इस्तेमाल किए गए उपकरण और सोशल मीडिया अकाउंट असली हैं या फर्जी पहचान के जरिए संचालित किए जा रहे थे।

इस घटना के बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सांसदों की सुरक्षा समीक्षा भी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जिन 25 सांसदों को धमकी दी गई थी, उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने पर विचार किया जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की धमकियां अस्वीकार्य हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह एक व्यक्तिगत स्तर पर दी गई धमकी प्रतीत होती है, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आरोपी का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है और उसके मोबाइल व अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती आक्रामकता और राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण इस तरह की धमकियों के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में त्वरित तकनीकी जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है ताकि गहन पूछताछ की जा सके। पूरे मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है और संसद की सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं।

यह घटना एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज एक व्यक्ति की हरकत थी या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश छिपी है।

