By: Vikash Kumar ( Vicky )
रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में एक साथ छापेमारी कर 15 ठिकानों को खंगाला है। यह कार्रवाई रेलवे भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों और एजेंट नेटवर्क की संलिप्तता सामने आ रही है।

ईडी सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला रेलवे में ग्रुप-डी, तकनीकी और अन्य पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर किया गया था। आरोप है कि गिरोह ने बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूल कर उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र, ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल सर्टिफिकेट तक थमा दिए।
चार राज्यों में एक साथ छापेमारी
ईडी की टीमों ने सोमवार तड़के एक साथ छापेमारी की।
बिहार: पटना, छपरा, मुजफ्फरपुर
उत्तर प्रदेश: लखनऊ, वाराणसी
गुजरात: अहमदाबाद
तमिलनाडु: चेन्नई
इन ठिकानों में आरोपी एजेंटों, बिचौलियों, कथित मास्टरमाइंड और उनके करीबी सहयोगियों के आवास व दफ्तर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान नकदी, बैंक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, जमीन-मकान से जुड़े कागजात और संदिग्ध लेन-देन के सबूत जब्त किए गए हैं।
करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का शक
ईडी का कहना है कि रेलवे नौकरी घोटाले से कमाए गए पैसों को हवाला, फर्जी कंपनियों और रिश्तेदारों के खातों के जरिए इधर-उधर किया गया। जांच एजेंसी को शक है कि इस घोटाले में करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, जिसे रियल एस्टेट, लग्जरी गाड़ियों और निवेश के रूप में खपाया गया। ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज केस के आधार पर की है। इससे पहले इस मामले में सीबीआई और राज्य पुलिस भी अलग-अलग स्तर पर जांच कर चुकी हैं।
कैसे चलता था रेलवे नौकरी का फर्जी खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक पूरा एजेंट नेटवर्क तैयार कर रखा था।
युवाओं को रेलवे में पक्की नौकरी का झांसा
5 से 15 लाख रुपये तक की डिमांड
फर्जी कॉल लेटर और ज्वाइनिंग लेटर
नकली मेडिकल और ट्रेनिंग दस्तावेज
कई मामलों में युवाओं को कुछ दिन तक ट्रेनिंग भी कराई गई, ताकि उन्हें शक न हो। बाद में जब ज्वाइनिंग नहीं हुई, तो आरोपी गायब हो गए।
बेरोजगार युवाओं से बड़ा विश्वासघात
यह घोटाला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि देश के लाखों बेरोजगार युवाओं के सपनों से खिलवाड़ है। रेलवे जैसी प्रतिष्ठित संस्था के नाम पर की गई इस ठगी ने युवाओं और उनके परिवारों को गहरी मानसिक व आर्थिक चोट पहुंचाई है। पीड़ितों में बिहार और यूपी के ग्रामीण इलाकों के युवा ज्यादा हैं, जिन्होंने नौकरी के लिए जमीन गिरवी रखी या कर्ज लिया था।

आगे और गिरफ्तारी संभव
ईडी सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के बाद कुछ बड़े नामों पर शिकंजा कस सकता है। आने वाले दिनों में
पूछताछ
गिरफ्तारी
संपत्ति कुर्की
जैसी कार्रवाइयां हो सकती हैं। ईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले में किसी पूर्व या वर्तमान रेलवे अधिकारी की भूमिका रही है।
राजनीतिक हलचल भी तेज
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्ष जहां इसे सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
ईडी का साफ संदेश
ईडी ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संकेत दिया है कि
“सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।”
जांच एजेंसी ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी भर्ती प्रक्रिया में केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन और वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

