By: Vikash Kumar (Vicky)
देश में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके साथ साइबर फ्रॉड, गलत तरीके से फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचने और जबरन लोन वसूली जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी की है। मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों की जानकारी दी, जिनका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

मिस-सेलिंग पर सख्ती, गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने वालों पर कार्रवाई
RBI का पहला बड़ा प्रस्ताव फाइनेंशियल प्रोडक्ट की गलत बिक्री यानी मिस-सेलिंग को रोकने से जुड़ा है। कई मामलों में बैंक या वित्तीय संस्थाएं ग्राहकों को गलत जानकारी देकर लोन, बीमा या निवेश योजनाएं बेच देती हैं, जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नए दिशानिर्देशों के तहत ऐसे मामलों में संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाएगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे। इससे ग्राहकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलने की उम्मीद है।

जबरन लोन वसूली और रिकवरी एजेंट्स पर कड़े नियम
देशभर में रिकवरी एजेंट्स द्वारा डराने-धमकाने या मानसिक दबाव डालने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। RBI ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए रिकवरी एजेंट्स की नियुक्ति और उनके व्यवहार से संबंधित सभी मौजूदा निर्देशों की समीक्षा करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत किसी भी हाल में बकायेदार को अपमानित करना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना स्वीकार्य नहीं होगा। इससे बैंकिंग प्रणाली में जिम्मेदारी और पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

फर्जी डिजिटल ट्रांजैक्शन पर राहत, ₹25,000 तक मुआवज़े की तैयारी
RBI का तीसरा बड़ा प्रस्ताव अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों में ग्राहकों की जिम्मेदारी सीमित करने से संबंधित है। स्मॉल वैल्यू फ्रॉड ट्रांजैक्शन में यदि ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसे अधिकतम ₹25,000 तक मुआवज़ा देने के लिए अलग फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इससे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी और बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा।

नए नियमों से कैसे मिलेगा आम ग्राहकों को फायदा
इन प्रस्तावों के लागू होने से बैंक और वित्तीय संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। मिस-सेलिंग पर रोक लगने से ग्राहकों को सही जानकारी के साथ फैसले लेने में मदद मिलेगी। रिकवरी एजेंट्स के लिए सख्त नियम बनने से जबरन वसूली और मानसिक उत्पीड़न के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। वहीं फर्जी ट्रांजैक्शन पर मुआवज़े का प्रावधान डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित बनाएगा।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की राय और आगे की प्रक्रिया
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए दिशानिर्देशों के लागू होने से बैंकिंग सेक्टर में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि फिलहाल ये प्रस्ताव ड्राफ्ट चरण में हैं और अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इनका पूर्ण प्रभाव सामने आएगा। RBI द्वारा जारी विस्तृत दिशानिर्देशों के बाद बैंकिंग संस्थाओं को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने होंगे।

यह लेख RBI द्वारा घोषित प्रस्तावों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अंतिम नियम और दिशा-निर्देश जारी होने के बाद इनमें बदलाव संभव है। बैंकिंग या वित्तीय निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों और विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।
