बिहार की राजनीति में मतगणना से पहले ही माहौल गरमा गया है। आरजेडी (RJD) ने मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए चुनाव आयोग से कड़ी निगरानी की मांग की है। पार्टी ने दावा किया है कि कुछ जिलों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा को लेकर गंभीर शिकायतें मिली हैं। वहीं, बीजेपी (BJP) ने आरजेडी के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि “बिहार में कानून का राज है, गुंडाराज नहीं। जो लोग पहले प्रशासन को अपने कब्जे में रखते थे, वे अब अपनी हार देखकर बौखला गए हैं।” जायसवाल ने यह भी कहा कि मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है, और चुनाव आयोग की देखरेख में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।
RJD ने उठाए सवाल
आरजेडी प्रवक्ता चंदन वर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ जिलों में ईवीएम मशीनों को मतगणना केंद्रों में पहुंचाने में देरी हुई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा,
“हम चुनाव आयोग से आग्रह करते हैं कि मतगणना के दौरान सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जाए और हर चरण की वीडियोग्राफी कराई जाए। अगर कोई गड़बड़ी होती है तो हम सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।”
आरजेडी का दावा है कि उनके पास ऐसे प्रमाण हैं जिनसे यह साबित होता है कि कुछ सीटों पर मशीनों की मूवमेंट संदिग्ध रही है। पार्टी ने आयोग से यह भी मांग की है कि EVM के साथ VVPAT पर्चियों की अनिवार्य मिलान प्रक्रिया 100% सीटों पर की जाए ताकि किसी को भी मतगणना पर संदेह न रहे।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने आरजेडी पर चुनावी माहौल में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा,
“आरजेडी जानती है कि जनता ने उन्हें नकार दिया है, इसलिए अब वे बहानेबाजी कर रहे हैं। बिहार में अब गुंडाराज नहीं बल्कि सुशासन का दौर है। मतगणना निष्पक्ष होगी और बीजेपी भारी बहुमत से सरकार बनाएगी।”
जायसवाल ने आगे कहा कि आरजेडी को पहले अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए और जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग की टीम पूरी तरह मुस्तैद है और किसी को भी अफवाह फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
इस बीच, बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मतगणना केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। हर केंद्र पर पुलिस, अर्धसैनिक बल और वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था है। आयोग ने कहा कि किसी भी पार्टी को किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए क्योंकि हर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार,
“ईवीएम मशीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है। सभी मशीनें सील्ड रूम में हैं और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि वहां लगातार निगरानी कर रहे हैं।”
तेजस्वी यादव ने दी चेतावनी
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा कि “जनता का जनादेश अगर छेड़ने की कोशिश की गई तो हम शांत नहीं बैठेंगे। बिहार की जनता की जीत की रक्षा के लिए आरजेडी आखिरी दम तक संघर्ष करेगी।”
तेजस्वी ने कहा कि इस बार बिहार की जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और अब कोई भी ताकत इस जनादेश को रोक नहीं सकती। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतगणना केंद्रों के बाहर शांति बनाए रखें, लेकिन निगरानी जरूर करें।
राजनीतिक माहौल गरमाया
जैसे-जैसे मतगणना की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों में बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ आरजेडी गड़बड़ी की आशंका जता रही है, वहीं बीजेपी आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पार्टियां अपने-अपने समर्थकों को एकजुट रखने की कोशिश में हैं।
पटना यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. आर.एन. मिश्रा का कहना है,
“ऐसे बयान चुनावी माहौल में आम हैं। जब किसी पार्टी को अपनी जीत या हार का अंदेशा होता है तो वह पहले से ही माहौल तैयार करने लगती है ताकि परिणाम आने के बाद वह नैरेटिव सेट कर सके।”
जनता की नजर नतीजों पर
बिहार के मतदाता अब 18 नवंबर को होने वाली मतगणना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राज्य के कई जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों के बाहर धारा 144 लागू कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस बार के चुनाव में बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। एग्जिट पोल में कांटे की टक्कर दिखाई गई है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के वोट तय करेंगे।
मतगणना से पहले आरजेडी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां आरजेडी गड़बड़ी की आशंका जता रही है, वहीं बीजेपी इसे झूठा प्रचार करार दे रही है। अब नजरें 18 नवंबर की मतगणना पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा — तेजस्वी यादव या एनडीए गठबंधन?

