By: Vikash Kumar (Vicky)
होली रंगों, खुशियों और उमंग का त्योहार है। बच्चे इस दिन सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं और घंटों तक रंगों के साथ खेलते हैं। लेकिन बदलते समय में केमिकल युक्त रंगों और पिचकारी के प्रेशर के कारण बच्चों की आंख, नाक, कान और त्वचा पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ENT स्पेशलिस्ट का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर होली को सुरक्षित और आनंददायक बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं बच्चों के लिए सेफ होली मनाने की जरूरी गाइडलाइंस।

केमिकल वाले रंगों से रखें दूरी
बाजार में मिलने वाले कई रंगों में हानिकारक केमिकल, भारी धातुएं और सिंथेटिक डाई मिलाई जाती हैं। ये रंग आंखों में जलन, एलर्जी, इंफेक्शन और त्वचा पर रैशेज का कारण बन सकते हैं। बच्चों के लिए हमेशा हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का ही इस्तेमाल करें। घर पर भी फूलों और हल्दी से प्राकृतिक रंग तैयार किए जा सकते हैं।
आंखों की सुरक्षा है सबसे जरूरी
होली के दौरान रंग सबसे पहले आंखों को प्रभावित करते हैं। तेज रंग या गंदा पानी आंखों में जाने से कंजंक्टिवाइटिस, सूजन और जलन हो सकती है। बच्चों को समझाएं कि वे सीधे चेहरे पर रंग न डालें। अगर रंग आंख में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं और जलन बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करें। होली खेलते समय बच्चों को सनग्लास पहनाना भी फायदेमंद हो सकता है।

नाक और सांस से जुड़ी सावधानियां
सूखे गुलाल के महीन कण बच्चों की नाक में जाकर एलर्जी, छींक, नाक बंद या सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकते हैं। जिन बच्चों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत है। ऐसे बच्चों को मास्क पहनाकर ही बाहर भेजें और ज्यादा धूल-गुलाल वाली जगहों से दूर रखें।
कानों की सुरक्षा पर भी दें ध्यान
पानी से भरे गुब्बारे या तेज पिचकारी का प्रेशर कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चों को समझाएं कि वे कानों पर सीधे पानी या गुब्बारे न मारें। अगर होली के बाद कान में दर्द, पानी आना या सुनने में दिक्कत हो तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से जांच करवाएं।

त्वचा की सुरक्षा के उपाय
होली खेलने से पहले बच्चों की त्वचा और बालों पर नारियल तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं। इससे रंग सीधे त्वचा में नहीं चिपकेगा और आसानी से निकल जाएगा। फुल स्लीव्स कपड़े पहनाना बेहतर होता है ताकि शरीर कम एक्सपोज हो। होली के बाद बच्चों को हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं और माइल्ड साबुन का इस्तेमाल करें।
खाने-पीने का रखें ध्यान
होली के दौरान बच्चे बाहर का खाना ज्यादा खा लेते हैं। कोशिश करें कि उन्हें घर का बना ताजा और साफ खाना ही दें। ज्यादा ठंडे पेय या मिलावटी मिठाइयों से बचाएं ताकि गले और पेट की समस्या न हो।

धूप और डिहाइड्रेशन से बचाव
मार्च की धूप में लंबे समय तक खेलने से बच्चों को डिहाइड्रेशन हो सकता है। बीच-बीच में उन्हें पानी, नारियल पानी या नींबू पानी पिलाते रहें। सिर को ढकने के लिए कैप या दुपट्टे का इस्तेमाल करें।
एलर्जी या इंफेक्शन के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
अगर बच्चे को आंखों में तेज जलन, सांस लेने में परेशानी, त्वचा पर सूजन या कान में दर्द की शिकायत हो तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर उपचार से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

होली खुशियों का त्योहार है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से आप अपने बच्चों के लिए होली को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी प्रकार की एलर्जी, संक्रमण या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग्य चिकित्सक या ENT विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

