By: Vikash Kumar (Vicky)
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में ब्रह्मांड की संरचना को अत्यंत विस्तृत और रहस्यमयी रूप में बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह सृष्टि केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है बल्कि इसके ऊपर कई दिव्य लोक मौजूद हैं, जहां विभिन्न देवता और दिव्य शक्तियां निवास करती हैं। हिंदू धर्म में कुल 14 लोकों का उल्लेख मिलता है, जिनमें 7 ऊर्ध्व लोक यानी पृथ्वी के ऊपर स्थित लोक और 7 अधोलोक बताए गए हैं। इन ऊर्ध्व लोकों को आध्यात्मिक विकास और दिव्य ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।

भूलोक से शुरू होती है सृष्टि की यात्रा
भूलोक को पृथ्वी लोक भी कहा जाता है और यह वही स्थान है जहां मनुष्य, पशु-पक्षी और अन्य जीव रहते हैं। सनातन धर्म के अनुसार, भूलोक कर्मभूमि है, जहां व्यक्ति अपने कर्मों के आधार पर आगे के लोकों की यात्रा तय करता है। यहां जीवन का उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए कर्म करना माना गया है। पृथ्वी लोक से ही आत्मा की आध्यात्मिक यात्रा आगे बढ़ती है।
भुवर्लोक में निवास करते हैं सूक्ष्म शक्तियां और देवगण
भुवर्लोक को पृथ्वी और स्वर्ग के बीच का क्षेत्र माना गया है। शास्त्रों में इसे पितरों, सिद्धों और कुछ दिव्य शक्तियों का निवास स्थान बताया गया है। यह लोक सूक्ष्म ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्तियों का क्षेत्र माना जाता है, जहां वे आत्माएं रहती हैं जो मोक्ष की ओर अग्रसर होती हैं। कई ग्रंथों में इसे अंतरिक्ष लोक भी कहा गया है।

स्वर्लोक यानी देवलोक, जहां इंद्र और देवता करते हैं निवास
स्वर्लोक को स्वर्ग लोक भी कहा जाता है और इसे देवताओं का मुख्य निवास स्थान माना गया है। यहां इंद्र देव, अप्सराएं, गंधर्व और अन्य देव शक्तियां निवास करती हैं। पुराणों के अनुसार, स्वर्ग लोक सुख-सुविधाओं और दिव्य आनंद से भरा हुआ है। यहां वे आत्माएं पहुंचती हैं जिन्होंने पृथ्वी पर अच्छे कर्म किए होते हैं और पुण्य अर्जित किया होता है।

महर्लोक में रहते हैं महान ऋषि और तपस्वी
महर्लोक को अत्यंत पवित्र और उच्च आध्यात्मिक स्तर का लोक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यहां महर्षि भृगु जैसे महान ऋषि और तपस्वी निवास करते हैं। यह लोक ज्ञान, तपस्या और ध्यान का केंद्र माना जाता है, जहां आत्माएं उच्च आध्यात्मिक चेतना प्राप्त करती हैं।
जनलोक में निवास करते हैं ब्रह्मा के मानस पुत्र
जनलोक को ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों और महान संतों का निवास स्थान माना गया है। यहां सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार जैसे महान ऋषियों का वास बताया गया है। यह लोक आध्यात्मिक ज्ञान और दिव्य चेतना से परिपूर्ण माना जाता है और यहां पहुंचने वाली आत्माएं अत्यंत उच्च स्तर की मानी जाती हैं।

तपोलोक में तपस्या और योग की चरम साधना
तपोलोक को महान तपस्वियों और योगियों का स्थान बताया गया है। यहां वे दिव्य आत्माएं रहती हैं जो निरंतर तप और साधना में लीन रहती हैं। यह लोक अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी माना जाता है, जहां आत्माएं मोक्ष के अंतिम चरण की ओर बढ़ती हैं।
सत्यलोक या ब्रह्मलोक, सृष्टि का सर्वोच्च दिव्य लोक
सत्यलोक को ब्रह्मलोक भी कहा जाता है और इसे सृष्टि का सर्वोच्च लोक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यहां ब्रह्मा जी का निवास होता है और यह लोक परम ज्ञान और दिव्यता का केंद्र है। माना जाता है कि यहां पहुंचने वाली आत्माएं जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त करती हैं।

यह लेख धार्मिक ग्रंथों, पुराणों और सनातन परंपराओं में वर्णित मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में इन लोकों के वर्णन में भिन्नता हो सकती है। इसे आस्था और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पढ़ें।

