स्कूल बैग का बढ़ता वजन लंबे समय से अभिभावकों, शिक्षकों और डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारी-भरकम बैग की वजह से बच्चों में कमर दर्द, कंधों में खिंचाव, थकान और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में स्कूल बैग के वजन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने खुद बताया है कि किस कक्षा के बच्चों का स्कूल बैग अधिकतम कितने किलोग्राम होना चाहिए।

NEP 2020 में क्या कहा गया है स्कूल बैग को लेकर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.33 में साफ तौर पर कहा गया है कि एनसीईआरटी, एससीईआरटी, स्कूल प्रशासन और शिक्षक मिलकर बच्चों के स्कूल बैग का वजन कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं। पढ़ाई को बोझ बनने से रोकना और बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करना इस नीति का मुख्य उद्देश्य है। इसके बाद सीबीएसई, एनसीईआरटी, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय संगठन की विशेषज्ञ समिति ने मिलकर School Bag Policy तैयार की।
प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए बैग पूरी तरह मना
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बैग ले जाने की कोई जरूरत नहीं है। इस स्तर पर पढ़ाई खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित होनी चाहिए, जिससे बच्चों पर शारीरिक दबाव न पड़े।
कक्षा 1 से 12 तक स्कूल बैग का तय वजन
लोकसभा में सांसद रामवीर सिंह विधूड़ी के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने NEP 2020 के अनुसार क्लास-वाइज स्कूल बैग के अधिकतम वजन की जानकारी दी है।
पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों का बैग 1.6 से 2.2 किलोग्राम तक होना चाहिए।
तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल बैग का वजन 1.7 से 2.5 किलोग्राम निर्धारित किया गया है।
छठवीं और सातवीं कक्षा के बच्चों के बैग का वजन 2 से 3 किलोग्राम तक सीमित होना चाहिए।
आठवीं कक्षा के लिए यह सीमा 2.5 से 4 किलोग्राम तय की गई है।
नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल बैग का वजन 2.5 से 4.5 किलोग्राम तक होना चाहिए।
ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों का स्कूल बैग 3.5 से 5 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
10 Bagless Days को अनिवार्य करने की सिफारिश
सरकार ने यह भी बताया है कि सभी स्कूलों के वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर में 10 बैगलेस डेज (Bagless Days) को अनिवार्य रूप से शामिल करने की सिफारिश की गई है। इन दिनों में बच्चों को बिना बैग स्कूल आना होगा और उन्हें प्रोजेक्ट वर्क, खेल, कला, कौशल विकास और जीवनोपयोगी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
नीति के बावजूद क्यों नहीं बदले हालात
हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और स्कूलों को यह नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी स्थिति में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आता। आज भी छोटे-छोटे बच्चे जरूरत से ज्यादा भारी बैग लेकर स्कूल जाते हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों को टाइम-टेबल और किताबों की संख्या पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।
अभिभावकों और स्कूलों की जिम्मेदारी
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नियम बनाना ही काफी नहीं है। स्कूलों को सख्ती से बैग नीति लागू करनी होगी और अभिभावकों को भी रोजाना बच्चों के बैग की जांच करनी चाहिए। डिजिटल कंटेंट, साझा किताबें और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
यह जानकारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शिक्षा मंत्रालय के संसद में दिए गए उत्तर और आधिकारिक दिशानिर्देशों पर आधारित है। नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है, इसलिए संबंधित स्कूल या शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूचना जरूर देखें।
