मुंबई, 14 दिसंबर 2025 – भारतीय शेयर बाजार ने आज मिश्रित रुझान के साथ कारोबार समाप्त किया, जिसमें निवेशकों ने थोड़ी सतर्कता दिखाई और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NSE Nifty50 ने हफ्ते में मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया, जिससे बाजार में निवेशकों ने तीव्र तेजी और गिरावट दोनों को देखा।

आज बाजार में तकनीकी और फंडामेंटल फैक्टर्स दोनों ने मिलकर सोचा-समझा रुख अपनाया। पिछले सत्रों में निवेशकों ने लाभांश बुकिंग की प्राथमिकता दी, जिसके कारण कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज हुई। वहीं दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों में मजबूत खरीदारी भी देखी गई, जिससे कुल मिलाकर बाजार का समग्र रुख संतुलित रहा।
मुख्य सूचकांकों का प्रदर्शन
आज के सत्र में Sensex और Nifty ने अस्थिरता भरा रुख दिखाया। हफ्ते के कुल रुझान को देखें तो Nifty में लगभग 0.53% की गिरावट दर्ज हुई, जो बाजार में हल्की कंसोलिडेशन का संकेत देता है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स ने हफ्ते में ऊँच-नीच स्तरों को छुआ, लेकिन व्यापक बाजार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह कंसोलिडेशन समय है, जहाँ निवेशक अगले महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों और ताज़ा डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं। इसके चलते बाजार की दिशा के लिए दीर्घकालिक ट्रेंड लंबा-अवधि हलचल के बाद साफ़ हो सकता है।
क्या हुआ मार्केट में?
मूल धारणा: बाजार ने इस सप्ताह हल्की गिरावट के साथ समाप्त किया, विशेष रूप से Nifty50 ने एक सीमित रेंज में कारोबार किया।
बड़े शेयरों में गिरावट: हफ्ते के दौरान Bajaj Finance और ICICI Bank जैसे प्रमुख शेयरों के बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट देखी गई।
कुछ बढ़त वाले शेयर: इसके विपरीत, Reliance Industries और TCS ने इस सप्ताह कुछ सकारात्मक रुझान बनाए रखा है, जिससे बाजार में मिश्रित रुख देखने को मिला।
ग्राह्य संकेत: विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली जारी रखी, लेकिन घरेलू निवेशकों ने SIP जैसे निवेश से बाजार को स्थिर रखा।
बाज़ार का तकनीकी स्वरूप
विश्लेषकों का मानना है कि Sensex और Nifty की चाल में जब तक क्लियर ट्रेंड नहीं आता, निवेशक अतिशय उत्साह या भय दोनों से बचें और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान दें। तकनीकी चार्ट संकेत देते हैं कि बाजार फिलहाल सपोर्ट और रेज़िस्टेंस स्तरों के बीच संभावित उतार-चढ़ाव जारी रख सकता है।
विशेष रूप से विश्लेषक सुझाव देते हैं कि Nifty के लिए मुख्य सपोर्ट स्तर लगभग 25,900 और रेज़िस्टेंस स्तर 26,100–26,200 के बीच स्थित है, जो अगले सप्ताह की दिशा निर्धारित कर सकता है।
बाज़ार को प्रभावित करने वाले कारक
वैश्विक संकेत: हाल ही में अमेरिका में ब्याज दर में बदलाव और वैश्विक आर्थिक संकेतक भारतीय बाजारों पर प्रभाव डाल रहे हैं।
आर्थिक डेटा: अगले सप्ताह WPI मुद्रास्फीति जैसे आंकड़ों का खुलासा होने वाला है, जो बाजार की दिशा को और स्पष्ट करेगा।
FII प्रवाह: विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, जिसने बाजार को कटु और पेचिदा स्थिति में रखा है।
वैश्विक बाजार: अंतरराष्ट्रीय बाजारों की चाल भी भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का एक आधारभूत कारण है।
निवेशकों के लिए सुझाव
विश्लेषक और बाजार विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:
लंबी अवधि पर फोकस करें: अल्पकालिक उतार-चढ़ाव में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए।
डायवर्सीफिकेशन: पोर्टफोलियो को सेक्टर्स में विभाजित रखने से जोखिम कम किया जा सकता है।
टेक्निकल इंडिकेटर्स देखें: सपोर्ट-रेज़िस्टेंस और वॉल्यूम संकेतकों पर नज़र रखें।
फंडामेंटल स्टॉक पर विचार करें: मजबूत बैलेंस शीट वाले शेयरों को प्राथमिकता दें।
आने वाला सप्ताह
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की निगाह नया WPI डेटा, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक बाजार के संकेतों पर होगी। बाजार की दिशा तय करने में ये प्रमुख कारक भूमिका निभाएंगे और अगले ट्रेडिंग सत्र के लिए संकेत देंगे।
