By: Vikash Kumar (Vicky)
हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व मनाए जाते हैं जिनका गहरा संबंध आस्था, परंपरा और लोक मान्यताओं से जुड़ा होता है। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पर्व है शीतला अष्टमी। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और उन्हें बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से रक्षा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व होलिका दहन के लगभग आठ दिन बाद आता है, इसलिए इसे होली के बाद आने वाले प्रमुख त्योहारों में भी शामिल किया जाता है।
बसोड़ा या बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है यह पर्व
शीतला अष्टमी को कई स्थानों पर बसोड़ा या बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन एक विशेष परंपरा का पालन किया जाता है जिसमें लोग ताजा भोजन नहीं बनाते हैं। शीतला अष्टमी से एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को भोजन तैयार कर लिया जाता है और अगले दिन उसी बासी भोजन को माता शीतला को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को ठंडा या बासी भोजन प्रिय माना जाता है। इसलिए इस दिन घरों में पूरी, पकवान, चावल, दही और मीठे व्यंजन एक दिन पहले बनाए जाते हैं और अष्टमी के दिन माता को अर्पित किए जाते हैं।

उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है यह पर्व
शीतला अष्टमी का पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत के कई राज्यों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार के कई क्षेत्रों में इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त माता शीतला के मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई जगहों पर लोग सुबह-सुबह मंदिर जाकर माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाते हैं और पूरे परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।
क्या है माता शीतला की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। खासकर पुराने समय में चेचक जैसी बीमारियों से बचाव के लिए माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा से माता की पूजा करने से परिवार के सदस्यों को बीमारियों से रक्षा मिलती है और घर में स्वास्थ्य एवं समृद्धि बनी रहती है।

इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा करती हैं और उनसे परिवार की खुशहाली और रोगों से रक्षा की प्रार्थना करती हैं। कई स्थानों पर इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है।

शीतला अष्टमी पर कैसे की जाती है पूजा
शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और घर या मंदिर में माता शीतला की पूजा की जाती है। माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसमें पूरी, पुआ, दही, चावल और अन्य पकवान शामिल होते हैं। पूजा के बाद परिवार के सदस्य उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

इसके अलावा कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन दान करते हैं और माता शीतला से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। विभिन्न स्थानों और परंपराओं के अनुसार पूजा विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार निर्णय लेना उचित है।

