By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को दिल्ली की पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऑस्ट्रेलिया की अदालत द्वारा पारित आदेश भारत में स्वतः लागू नहीं होगा। इसके साथ ही अदालत ने धवन की पूर्व पत्नी ऐशा मुखर्जी को धोखाधड़ी और जबरन वसूली के आरोपों के आधार पर 5.7 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है।
यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ था। धवन और उनकी पूर्व पत्नी ऐशा मुखर्जी के बीच वैवाहिक संबंधों में आई दरार के बाद संपत्ति और वित्तीय लेनदेन को लेकर कई आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। शिखर धवन ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनसे अनुचित तरीके से बड़ी धनराशि ली गई और ऑस्ट्रेलियाई अदालत के आदेश के आधार पर उन पर वित्तीय दबाव बनाया जा रहा है।

पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह माना कि किसी विदेशी अदालत का आदेश भारत में तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक उसे भारतीय कानून के तहत मान्यता न दी जाए। अदालत ने यह भी कहा कि विदेशी डिक्री को लागू करने के लिए विधिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों और तर्कों के आधार पर न्यायाधीश ने पाया कि वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी थी और शिखर धवन से जबरन वसूली के आरोप prima facie सही प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने ऐशा मुखर्जी को 5.7 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया।

शिखर धवन, जिन्हें क्रिकेट जगत में ‘गब्बर’ के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से निजी जीवन को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनका और ऐशा मुखर्जी का विवाह वर्ष 2012 में हुआ था। दोनों के बीच कुछ वर्षों बाद मतभेद बढ़े और अंततः अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। कानूनी रूप से तलाक की प्रक्रिया के दौरान संपत्ति और वित्तीय मामलों को लेकर विवाद और गहरा गया।
धवन की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत का आदेश भारतीय कानून के अनुरूप नहीं है और उसे लागू करने से पहले भारतीय अदालत की स्वीकृति आवश्यक है। वहीं ऐशा मुखर्जी की ओर से तर्क दिया गया कि आदेश वैध है और उसे लागू किया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायिक प्रणाली में विदेशी आदेशों को सीधे लागू करने का प्रावधान नहीं है, जब तक कि वह भारतीय सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 और 44A के तहत मान्यता प्राप्त न हो। अदालत ने इस मामले में विदेशी आदेश को लागू करने से इनकार करते हुए भारतीय कानून को प्राथमिकता दी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है जहां दंपत्ति अलग-अलग देशों में रहते हैं और एक देश की अदालत का आदेश दूसरे देश में लागू करने की मांग की जाती है। अदालत का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय विवाह विवादों में भारतीय कानून की प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

फैसले के बाद शिखर धवन को बड़ी राहत मिली है। हालांकि ऐशा मुखर्जी के पास इस आदेश को उच्च अदालत में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है। यदि वह अपील दायर करती हैं, तो मामला आगे की न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश करेगा।
फिलहाल इस आदेश के बाद क्रिकेट जगत और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिखर धवन ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक विवादों में कानूनी जटिलताएं कितनी गंभीर हो सकती हैं। विदेशी अदालतों के आदेशों की भारत में वैधता और क्रियान्वयन को लेकर यह निर्णय एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की सुनवाई और संभावित अपील पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल के लिए शिखर धवन को कानूनी तौर पर बड़ी राहत मिल गई है।

