चुनाव आयोग ने देश के छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के मतदाताओं को बड़ी राहत देते हुए SIR फॉर्म (Special Summary Revision Form) जमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग के अनुसार, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार और उत्तर प्रदेश के नागरिक अब निर्धारित नई तारीख तक अपने SIR फॉर्म जमा कर सकेंगे। यह फैसला उन मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो अब तक नए वोटर कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पाए थे या जिनके आवेदन किसी कारण अधूरे रह गए थे।

चुनाव आयोग का यह निर्णय मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि कई राज्यों से फॉर्म भरने में आ रही दिक्कतों और पहुंच संबंधी चुनौतियों की जानकारी मिली थी। आयोग का कहना है कि वह चाहता है कि अधिक से अधिक पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल हो ताकि आगामी चुनाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
क्या है SIR फॉर्म और क्यों जरूरी है?
SIR फॉर्म का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने और स्थान परिवर्तन जैसी प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है। यह उन युवाओं के लिए भी अहम है जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं और पहली बार वोट डालने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision) हर वर्ष आयोजित किया जाता है, जिसमें मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य होता है। इस अवधि में आवेदन करने वालों को आसान प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मौका मिलता है।
किन राज्यों को मिली राहत?
इस निर्णय से देश के इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के मतदाताओं को राहत मिलेगी:
तमिलनाडु
गुजरात
मध्य प्रदेश
छत्तीसगढ़
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
उत्तर प्रदेश
इन राज्यों से चुनाव आयोग को बड़ी संख्या में ऐसे मामले मिले थे, जहां तकनीकी कारणों या दस्तावेज़ी समस्याओं की वजह से लोग समय सीमा से पहले SIR फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे थे। इसी को देखते हुए आयोग ने समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया।
नए मतदाताओं के लिए खास मौका
जिन युवाओं ने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी की है, उनके लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। वे अब बिना किसी अतिरिक्त दबाव के ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने फॉर्म जमा कर सकते हैं।
ऑफलाइन माध्यम से बीएलओ (Booth Level Officer) के पास फॉर्म जमा किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन NVSP पोर्टल या Voter Helpline App से किया जा सकता है।
आयोग का कहना है कि युवा मतदाताओं की भागीदारी लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसी वजह से इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को आम जनता के लिए सरल बनाया गया है।
क्यों बढ़ानी पड़ी समय सीमा?
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि—
वेबसाइट पर एक साथ बढ़ती ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं।
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दस्तावेज़ सत्यापन में देरी हो रही थी।
कई नागरिक छुट्टियों या व्यस्तता के कारण समय पर आवेदन नहीं कर पाए।
कुछ क्षेत्रों में फॉर्म जमा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज लोगों के पास उपलब्ध नहीं थे।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समय बढ़ाकर नागरिकों को राहत देने का फैसला लिया।
आवेदन प्रक्रिया में क्या बदलाव?
चुनाव आयोग ने इस बार प्रक्रिया को पहले से अधिक डिजिटल और तेज़ बनाया है।
e-KYC और Aadhaar आधारित सत्यापन को और सरल किया गया है।
अपलोड की जाने वाली दस्तावेज़ फाइलों के आकार की सीमा बढ़ाई गई है।
आवेदन की स्थिति अब ऐप पर लाइव दिखाई देगी।
जिन फॉर्म में गलतियां होंगी, उनके लिए SMS और ईमेल के माध्यम से तुरंत सूचित किया जाएगा।
इस अपडेट से लोगों की आवेदन प्रक्रिया तेज़ होने की उम्मीद है।
राज्यों में चुनाव की तैयारी पर असर
राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारी भी तेज़ी से चल रही है और यह माना जा रहा है कि नई मतदाता सूची में इस समय सीमा विस्तार का बड़ा असर होगा।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में लाखों नए नाम जोड़े जाएंगे।
गुजरात और तमिलनाडु में शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद है।
अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप समूहों में लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण आवेदन प्रक्रिया धीमी थी, जिसे अब गति मिलेगी।
इस तरह, चुनाव आयोग का फैसला चुनावी तैयारियों को पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आयोग ने कहा— हर पात्र नागरिक का नाम शामिल हो
चुनाव आयोग ने फिर से दोहराया कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। हर पात्र मतदाता का नाम सूची में होना जरूरी है ताकि वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।
आयोग ने यह भी कहा है कि कोई भी व्यक्ति फॉर्म जमा करने में देरी न करे क्योंकि यह अंतिम मौका है, और अगली संशोधित मतदाता सूची इसी आधार पर जारी की जाएगी।
SIR फॉर्म की समय सीमा बढ़ाए जाने का लाभ लाखों लोगों को मिलेगा, खासकर उन राज्यों में जहां आवेदन प्रक्रिया पिछड़ रही थी। डिजिटल सुविधाओं में सुधार और आसान आवेदन व्यवस्था से उम्मीद है कि इस बार अधिक से अधिक नागरिक मतदाता सूची में शामिल होंगे। यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
