By: Vikash Kumar (Vicky)
(देवघर)। थाना क्षेत्र के पथरी गांव में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब गांव से सटे झांटी-जंगल इलाके में एक पेड़ से नाबालिग लड़की का शव लटका हुआ मिला। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और मौत के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़की रविवार को करीब चार बजे शाम घर से निकली थी। बताया गया कि वह रोजमर्रा के काम से बाहर गई थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। जब संध्या होने के बाद भी वह घर नहीं पहुंची तो परिजनों को चिंता होने लगी। परिजनों और गांव के लोगों ने रात भर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। पूरी रात खोजबीन के बावजूद जब कोई जानकारी हाथ नहीं लगी तो परिजन बेहद परेशान हो गए।
सोमवार सुबह गांव के बगल स्थित झांटी-जंगल की ओर गए कुछ ग्रामीणों ने एक पेड़ से किसी का शव लटकता हुआ देखा। इसकी सूचना तुरंत गांव में फैली, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। जब परिजन वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनकी नाबालिग बेटी का शव पेड़ से रस्सी के सहारे फांसी पर लटका हुआ है। यह दृश्य देखकर परिजनों का कलेजा फट गया और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही सोनारायठाढ़ी थाना प्रभारी रोहित कुमार दांगी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित किया और शव को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए देवघर सदर अस्पताल भेज दिया गया। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
पुलिस प्रारंभिक जांच में आत्महत्या और अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की पड़ताल कर रही है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है कि नाबालिग घर से किस उद्देश्य से निकली थी और क्या वह किसी मानसिक तनाव या पारिवारिक परेशानी से गुजर रही थी। वहीं पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस मामले में कोई बाहरी कारण या दबाव तो नहीं था।

ग्रामीणों के अनुसार, नाबालिग लड़की स्वभाव से शांत और मिलनसार थी। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह इस तरह का कदम उठा सकती है। घटना के बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग आपस में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं है। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन बना हुआ है।
घटना के बाद पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां-बाप बेसुध हालत में हैं और बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं। रिश्तेदारों और ग्रामीणों द्वारा उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन परिवार इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है। परिजनों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है और मामले की सच्चाई सामने लाने की अपील की है।
थाना प्रभारी रोहित कुमार दांगी ने बताया कि फिलहाल किसी तरह की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, क्योंकि परिजनों की ओर से अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी तरह की साजिश या अपराध की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में नाबालिगों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों को भावनात्मक सहयोग और सही मार्गदर्शन की बेहद जरूरत होती है। समय रहते यदि उनकी परेशानियों को समझा जाए तो ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है। पूरे इलाके में इस हृदयविदारक घटना को लेकर शोक का माहौल है और लोग प्रशासन से जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई और वजह छिपी हुई है।

