By:vikash kumar (vicky)
आज साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्य ग्रहण को लेकर देशभर में उत्सुकता का माहौल है। खास बात यह है कि इस बार का ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव भारत पर पड़ेगा या नहीं? आइए जानते हैं वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दोनों पहलुओं से इस ग्रहण का महत्व।

क्या होता है सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। इस दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है। यह पूरी तरह एक खगोलीय घटना है, जिसे विज्ञान की दृष्टि से सामान्य प्रक्रिया माना जाता है।

2026 का पहला सूर्य ग्रहण: समय और अवधि
खगोल विज्ञानियों के अनुसार, 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा। इसके बाद धीरे-धीरे ग्रहण अपने चरम पर पहुंचेगा और शाम 7:57 बजे समाप्त हो जाएगा। कुल मिलाकर यह ग्रहण करीब 4 घंटे 31 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
इस ग्रहण का भारत में दिखना या न दिखना इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रहण का पथ (Path of Eclipse) किन देशों से होकर गुजर रहा है। यदि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, तो इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अगर ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता है तो धार्मिक दृष्टि से उसका विशेष प्रभाव नहीं माना जाता।

फिलहाल उपलब्ध खगोलीय जानकारी के मुताबिक, यह ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दृश्य नहीं होगा। ऐसे में देश में सूतक काल लागू होने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम पुष्टि आधिकारिक खगोलीय संस्थानों द्वारा जारी जानकारी के आधार पर ही की जानी चाहिए।

कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में ग्रहण का महत्व
इस बार का सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि वायु तत्व की राशि है और इसका संबंध सामाजिक बदलाव, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाता है। धनिष्ठा नक्षत्र को साहस, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रहण का प्रभाव विशेष रूप से कुंभ राशि के जातकों पर अधिक पड़ सकता है। इसके अलावा मकर और मीन राशि वालों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि यह प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली पर भी निर्भर करता है।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:
– ग्रहण के समय सीधे सूर्य को न देखें।
– गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
– ग्रहण के दौरान भोजन न करने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है।
– ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इन मान्यताओं का कोई प्रमाणित आधार नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य ग्रहण को केवल वैज्ञानिक तरीके से समझना चाहिए और सुरक्षित चश्मे के बिना सूर्य को नहीं देखना चाहिए।
वैज्ञानिकों की क्या सलाह है?
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है। इससे आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए यदि ग्रहण कहीं दिखाई देता है, तो केवल प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष ग्रहण चश्मे का ही उपयोग करें।
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
भारत में सूर्य ग्रहण को लेकर हमेशा से धार्मिक आस्था जुड़ी रही है। मंदिरों के कपाट बंद करने, मंत्र जाप करने और दान-पुण्य करने की परंपरा रही है। हालांकि अगर ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, तो अधिकांश मंदिरों में सामान्य दिनचर्या जारी रह सकती है।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक रहेगा और कुंभ राशि व धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा। भारत में इसके दृश्य होने को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सूतक और धार्मिक प्रभावों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल विशेषज्ञ यही सलाह दे रहे हैं कि ग्रहण को लेकर किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
