
बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर लगाए गए आरोपों और उनके बयानों के जवाब में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर कई बार अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए पुरानी घटनाओं का हवाला दिया।
तेजस्वी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री स्वयं विपक्ष के नेताओं पर “अपशब्द” और “घटिया भाषा” का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें यह अधिकार नहीं कि वह दूसरों को भाषाई मर्यादा सिखाएं।
तेजस्वी का पलटवार – “भाषाई मर्यादा का उपदेश न दें”
“प्रधानमंत्री जी विपक्ष को यह उपदेश न दें कि उन्हें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं। आपने खुद दर्जनों बार मर्यादा तोड़ी है। कभी किसी नेता को ’50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ कहा, तो कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के DNA पर सवाल उठाए।”
तेजस्वी ने आगे कहा कि देश की जनता सब जानती है कि किसने राजनीति में व्यक्तिगत हमलों और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल शुरू किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उनके भाषणों में अक्सर विपक्ष के नेताओं के खिलाफ व्यक्तिगत कटाक्ष और अपमानजनक शब्द भरे रहते हैं।
’50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ से लेकर ‘नीतीश का DNA’ तक – तेजस्वी ने गिनाए मोदी के बयान
1. “50 करोड़ की गर्लफ्रेंड” बयान – तेजस्वी ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने एक बार एक राजनीतिक प्रतिद्वंदी की ओर इशारा करते हुए बेहद अमर्यादित टिप्पणी की थी। इस बयान ने उस समय राजनीति में भूचाल ला दिया था।
2. “नीतीश कुमार का DNA खराब” बयान – बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उनके DNA को लेकर बयान दिया था। उस बयान को लेकर बिहार की जनता और नेताओं ने नाराज़गी जताई थी।
3. अन्य अपशब्द – तेजस्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं की ओर से विपक्ष को “गिद्ध”, “परजीवी”, “कांग्रेस-मुक्त भारत” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया।
तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष अपशब्दों का प्रयोग करता है तो उसे राजनीतिक रणनीति कहा जाता है, लेकिन जब विपक्ष जवाब देता है तो उसे मर्यादा का उल्लंघन बताया जाता है।

“प्रधानमंत्री जी ने गाली को हथियार बनाया”

“प्रधानमंत्री जी ने गाली को हथियार बनाया”
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी ने राजनीति में अपमानजनक शब्दों को सामान्य बनाने का काम किया। उन्होंने कहा:
> “प्रधानमंत्री जी ने भाषणों में इतनी बार गालियों और कटाक्ष का इस्तेमाल किया है कि अब भाजपा कार्यकर्ता भी उसी शैली में बोलते हैं। अगर प्रधानमंत्री खुद ऐसी भाषा का प्रयोग करेंगे तो फिर समाज में वैचारिक गरिमा कैसे बचेगी?”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष के नेताओं को “गाली देने की राजनीति” का दोषी न ठहराएं, बल्कि पहले अपने बयानों की समीक्षा करें।
चुनावी मौसम और बढ़ती बयानबाज़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे बिहार और देश में चुनावी सरगर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे नेताओं के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप भी तेज़ हो जाते हैं। नरेंद्र मोदी और तेजस्वी यादव के बीच यह बयानबाज़ी उसी कड़ी का हिस्सा है।
तेजस्वी यादव इस समय बिहार में विपक्ष का चेहरा माने जाते हैं और उनकी पार्टी RJD लगातार भाजपा और जेडीयू सरकार पर हमलावर रहती है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में विपक्ष की नीतियों और बयानों पर कटाक्ष करने से पीछे नहीं हटते।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर लोग मोदी और तेजस्वी दोनों के पुराने भाषणों के क्लिप साझा कर रहे हैं। कुछ लोग तेजस्वी की बात से सहमत दिखे और कहा कि प्रधानमंत्री को भी भाषाई मर्यादा का पालन करना चाहिए, जबकि भाजपा समर्थकों ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष की राजनीति केवल “गाली और झूठ” पर आधारित है।
तेजस्वी यादव का यह बयान एक बार फिर यह साबित करता है कि भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत हमले और तीखी बयानबाज़ी अब आम हो चुकी है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही ओर से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
बिहार की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और भी गहराने की संभावना है क्योंकि चुनाव नज़दीक आते ही नेताओं की जुबानी जंग और तेज़ होगी।


