नसीब में था ये आखिरी रक्षाबंधन… सड़क हादसे में सिपाही की मौत, थाने में छाया मातम ।

हापुड़ – रक्षाबंधन का पर्व बहन-भाई के रिश्ते का सबसे खास दिन होता है, लेकिन इस बार यह दिन हापुड़ के एक परिवार और पुलिस विभाग के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया। रक्षाबंधन के दिन ड्यूटी पर लौटते समय सड़क हादसे में एक सिपाही की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही उनके घर में कोहराम मच गया और थाने में मातम पसर गया।
जानकारी के मुताबिक, मृतक सिपाही रक्षाबंधन पर अपने घर गए थे। बहन ने उन्हें राखी बांधी, मिठाई खिलाई और लंबी उम्र की दुआ की थी। घरवालों को क्या पता था कि यह उनका आखिरी रक्षाबंधन होगा। ड्यूटी पर लौटते समय उनकी कार हापुड़ के पास एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से जोरदार टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घायल सिपाही को पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर सुनते ही थाना परिसर में सन्नाटा छा गया। साथी सिपाही और अधिकारी स्तब्ध रह गए।
सिपाही की तैनाती हापुड़ जनपद में थी और वह अपने कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनकी ड्यूटी के प्रति लगन और बहादुरी की कई मिसालें पुलिस महकमे में दी जाती थीं। मौत की खबर मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर शोक व्यक्त किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
घर में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और छोटे बच्चे का रो-रोकर बुरा हाल है। बहन बार-बार यही कह रही है— “भैया ने कहा था कि जल्दी लौटेंगे, लेकिन अब वह कभी नहीं आएंगे।” रक्षाबंधन का धागा अभी भी उनकी कलाई में बंधा है, जो अब सिर्फ एक दर्दनाक याद बन गया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि हादसे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
सिपाही की आकस्मिक मौत से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा पुलिस विभाग शोक में है। उनके सम्मान में थाने में दो मिनट का मौन रखा गया। सहकर्मी उन्हें एक जांबाज और मददगार साथी के रूप में याद कर रहे हैं।
रक्षाबंधन का यह हादसा यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि ड्यूटी पर तैनात जवान हर त्योहार, हर खुशी में भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटते, लेकिन कभी-कभी नियति इतनी निर्दयी होती है कि खुशियों का दिन मातम में बदल जाता है।

