By: Vikash Kumar (Vicky)
बहराइच जिले में स्थित 42 साल पुराना ऐतिहासिक संजय सेतु अब मरम्मत के दौर से गुजरने वाला है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पुल की जर्जर होती संरचना को देखते हुए 17 फरवरी से इसे दो महीने के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। यह कार्य महाशिवरात्रि के बाद शुरू किया जाएगा। फिलहाल इस योजना के लिए शासन से अंतिम अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

संजय सेतु बहराइच ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह पुल वर्षों से भारी वाहनों और स्थानीय यातायात का मुख्य साधन बना हुआ है। लेकिन चार दशक से अधिक समय बीत जाने के कारण इसकी संरचना पर दबाव बढ़ गया है, जिससे इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी।
क्यों जरूरी हुई मरम्मत?
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, हाल के निरीक्षण में पुल की सतह, बीम और पिलरों में कई जगह क्षति के संकेत मिले हैं। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही और मौसम की मार के कारण पुल की हालत पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है। विशेषज्ञों की टीम ने रिपोर्ट में सुझाव दिया कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में यह बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने संजय सेतु की व्यापक मरम्मत का फैसला लिया है, ताकि आने वाले वर्षों में यह पुल सुरक्षित रूप से यातायात का भार उठा सके।

17 फरवरी से लागू होगा निर्णय
महाशिवरात्रि के बाद 17 फरवरी से पुल पर मरम्मत का काम शुरू होगा। इस दौरान पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। मरम्मत कार्य लगभग दो महीने तक चलेगा। हालांकि, यदि काम समय से पहले पूरा होता है तो पुल को निर्धारित समय से पहले भी खोला जा सकता है।
ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारी
पुल बंद होने से स्थानीय लोगों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारी शुरू कर दी है। वैकल्पिक मार्गों की पहचान कर ली गई है, जहां से वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही डायवर्जन प्लान सार्वजनिक किया जाएगा ताकि लोगों को पहले से जानकारी मिल सके और वे अपनी यात्रा की योजना उसी अनुसार बना सकें।

स्थानीय लोगों की बढ़ेगी परेशानी
संजय सेतु से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। स्कूल, कॉलेज, बाजार और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए यह पुल बेहद अहम है। पुल बंद होने से लोगों को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि पुल बंद होने से माल ढुलाई पर भी असर पड़ेगा, जिससे कारोबार प्रभावित हो सकता है।
सुरक्षा को प्राथमिकता
एनएचएआई अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह निर्णय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पुल की मरम्मत में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और विशेषज्ञ इंजीनियरों की देखरेख में यह कार्य किया जाएगा।

शासन की अनुमति का इंतजार
हालांकि एनएचएआई ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन कार्य शुरू करने से पहले शासन की अंतिम अनुमति मिलना आवश्यक है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही यह अनुमति मिल जाएगी और तय समय पर काम शुरू हो जाएगा।
क्या-क्या होगा मरम्मत में?
मरम्मत के दौरान पुल की सतह को दोबारा मजबूत किया जाएगा। क्षतिग्रस्त बीम और पिलरों की मरम्मत के साथ-साथ नई सुरक्षा परत भी चढ़ाई जाएगी। पुल की रेलिंग और किनारों को भी मजबूत बनाया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार का खतरा न रहे।

लोगों से अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस दौरान सहयोग करें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद संजय सेतु पहले से ज्यादा मजबूत और सुरक्षित हो जाएगा।
लंबे समय बाद हो रही बड़ी मरम्मत
बताया जा रहा है कि पिछले कई वर्षों से पुल की बड़ी मरम्मत नहीं हुई थी। छोटे-मोटे सुधार कार्य जरूर किए गए, लेकिन अब पहली बार इतने बड़े स्तर पर इसकी संरचना को दुरुस्त किया जाएगा।

भविष्य के लिए जरूरी कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने पुलों की समय-समय पर जांच और मरम्मत बेहद जरूरी है। संजय सेतु की मरम्मत भी इसी दिशा में एक अहम कदम है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सकेगा।
संजय सेतु की दो महीने की बंदी भले ही लोगों के लिए असुविधा लेकर आए, लेकिन यह कदम आने वाले वर्षों के लिए सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करेगा। प्रशासन और एनएचएआई की कोशिश है कि मरम्मत कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा कर पुल को फिर से यातायात के लिए खोल दिया जाए।
