लखनऊ, 15 नवंबर 2025 — उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को अपनी कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहद सहूलियत वाला फैसला लिया है। अब वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन करने वालों को अलग से कोई फॉर्म भरना नहीं होगा। इस बदलाव से पेंशन पाने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तेज़ हो जाएगी।

एक परिवार – एक पहचान
समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि यह नई व्यवस्था राज्य की “एक परिवार-एक पहचान” प्रणाली पर आधारित होगी। कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि प्रत्येक परिवार की एक पहचान होगी, जिससे उस परिवार के 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों का डेटा पहले से ही राज्य सरकार के पास होगा।
नए मॉडल में, सरकार अपने रिकॉर्ड के आधार पर सभी पात्र वरिष्ठ नागरिकों की पहचान करेगी। उसके बाद स्वचालित रूप से और सहमति के साथ उनकी पेंशन स्वीकृत की जाएगी। अगर वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सहमति देते हैं (जैसे एसएमएस, व्हाट्सएप या फोन कॉल द्वारा), तो प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा।
जहाँ डिजिटल सहमति नहीं हो पाती है, वहाँ स्थानीय अधिकारी या सहायक व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर लाभार्थी से संपर्क करेंगे और उनकी सहमति लेंगे।
बैंक खाते और आधार लिंकिंग
कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक, पेंशन राशि आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर होगी। यह कदम भी ज़रूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को समय पर और सुरक्षित भुगतान सुनिश्चित करेगा।
पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की रणनीति
इस नए निर्णय के पीछे सरकार का उद्देश्य सिर्फ आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना ही नहीं है, बल्कि पेंशन वितरण में पारदर्शिता भी बढ़ाना है। पिछले कुछ समय से 「वृद्धा पेंशन योजना」 में गलत लाभार्थियों की पहचान तथा दुरुपयोग की चर्चाएँ भी थीं।
असल में, उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही 61 लाख वृद्ध पेंशन धारकों का सत्यापन कर रही है। इस सत्यापन के दौरान, आधार प्रमाणीकरण, बैंक खाते और मोबाइल नंबरों को उसी रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है, ताकि एक-से-ज़्यादा पेंशन लेने वाले लोगों को चिन्हित किया जा सके।
लाभार्थियों के लिए असानी
यह कदम उन बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्होंने पेंशन पाने के लिए बार-बार फॉर्म भरने या आवेदन कार्यालयों में जाने जैसी झंझट का सामना किया था। इससे आवेदन प्रक्रिया में गलती-संभावना कम होगी और समय की बचत होगी।
कौन लाभार्थी होंगे? उन नागरिकों को पेंशन मिलेगी जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है, और जिनका नाम पहले ही सरकारी डेटा में “परिवार आईडी” प्रणाली के तहत दर्ज है।
सरकार की मंशा और भविष्य की तैयारी
सरकार इस नयी व्यवस्था को डिजिटल पहलों का हिस्सा मान रही है, जिसके ज़रिये वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त और सम्मानजनक जीवन दिया जा सके। ऐसे कदम यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार तकनीक का इस्तेमाल कर पेंशन वितरण को सरल और अधिक उत्तरदायी बना रही है।
मंत्रियों ने यह भी कहा है कि सहमति मिलने के 15 दिनों के भीतर पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
यह योजना न सिर्फ वर्तमान वरिष्ठ नागरिकों के लिए फायदेमंद है, बल्कि भविष्य में भी नए पात्रों के लिए पेंशन प्रणाली को सुगम करेगी — क्योंकि “एक परिवार-एक पहचान” मॉडल सरकारी डेटा के बेहतर उपयोग के लिए आधार बनाता है।
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
हालांकि यह फैसला व्यापक रूप से सराहनीय है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं:
उन बुज़ुर्गों के लिए जो डिजिटल रूप से सक्रिय नहीं हैं, सहमति प्रक्रिया कठिन हो सकती है।
स्थानीय अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत संपर्क की प्रक्रिया में लॉजिस्टिक समस्या आ सकती है।
सत्यापन की प्रक्रिया में देरी होने की संभावना, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सामाजिक कल्याण विभाग की पहुंच सीमित है।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का सवाल — एक पारिवारिक पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग न हो, इसके लिए मजबूत निगरानी की जरूरत होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक सुरक्षा ढाँचे को और मजबूत बनाएगा। इस कदम से पेंशन पाने की प्रक्रिया अब और अधिक सरल, त्वरित और विश्वसनीय होगी। “फॉर्म-फ्री” पेंशन प्रणाली न सिर्फ बुज़ुर्गों को राहत देती है, बल्कि राज्य के संवेदनशीलतम नागरिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
यदि यह निर्णय सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जहां पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता और डिजिटल पहचान का बेहतर उपयोग हो रहा हो।

