By: Vikash Kumar (Vicky)
डिजिटल पेमेंट के दौर में UPI आज भारत की सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद भुगतान प्रणाली बन चुकी है। करोड़ों लोग रोजाना Google Pay, PhonePe, Paytm और अन्य UPI ऐप्स के जरिए पैसे भेजते और प्राप्त करते हैं। अब साल 2026 की शुरुआत के साथ ही UPI से जुड़े कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं।

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने इन नए नियमों को लागू करने का फैसला किया है ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तेज और सर्वर फ्रेंडली बनाया जा सके। इन बदलावों का असर आम यूजर्स से लेकर छोटे दुकानदारों, ऑनलाइन व्यापारियों और नियमित डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों पर पड़ेगा।
बैलेंस चेक करने की लिमिट तय
नए नियमों के तहत अब UPI ऐप के जरिए बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक करने की सीमा तय कर दी गई है। यूजर एक दिन में किसी एक ऐप से अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएंगे। अगर किसी व्यक्ति के मोबाइल में एक से ज्यादा UPI ऐप्स हैं, तो हर ऐप के लिए अलग-अलग लिमिट लागू होगी। यानी दो ऐप होने पर कुल मिलाकर 100 बार बैलेंस चेक किया जा सकता है। NPCI का मानना है कि बार-बार बैलेंस चेक करने से सर्वर पर अनावश्यक लोड बढ़ता है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी है।

लिस्ट अकाउंट API पर भी नई सीमा
UPI सिस्टम में लिंक्ड बैंक अकाउंट की जानकारी देखने के लिए इस्तेमाल होने वाली List Account API पर भी नई लिमिट लागू की गई है। अब यूजर हर ऐप से सिर्फ 25 बार ही अपने लिंक्ड अकाउंट की जानकारी देख पाएंगे। इससे बैंकिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव कम होगा और ट्रांजैक्शन की स्पीड बेहतर रहेगी।
ऑटोपे ट्रांजैक्शन के लिए नया टाइम स्लॉट
सब्सक्रिप्शन, EMI, OTT पेमेंट और बिल भुगतान जैसे UPI ऑटोपे ट्रांजैक्शन अब केवल नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस किए जाएंगे। साथ ही हर ऑटोपे रिक्वेस्ट को केवल चार बार ही प्रोसेस किया जाएगा, जिसमें एक ओरिजिनल और तीन रिट्राई शामिल होंगे। इसका उद्देश्य ट्रांजैक्शन फेल्योर कम करना और सर्वर को स्थिर बनाए रखना है ताकि यूजर्स को बार-बार भुगतान विफल होने की समस्या से राहत मिल सके।

इनएक्टिव UPI ID होगी ऑटोमैटिक डिएक्टिवेट
अगर किसी यूजर की UPI ID पिछले 12 महीनों से इस्तेमाल में नहीं है, तो उसे अपने आप डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा। यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है क्योंकि कई बार मोबाइल नंबर दोबारा किसी अन्य व्यक्ति को अलॉट हो जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबर से जुड़े UPI अकाउंट का एक्टिव रहना जोखिम भरा हो सकता है।
बैंक अकाउंट लिंकिंग के लिए सख्त वेरिफिकेशन
UPI में नया बैंक अकाउंट जोड़ते समय अब पहले से ज्यादा कड़ा वेरिफिकेशन और यूजर ऑथेंटिकेशन प्रोसेस अपनाया जाएगा। इसका उद्देश्य फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजैक्शन को रोकना है। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम में यूजर्स का भरोसा और मजबूत होगा।

API रिस्पॉन्स टाइम में बड़ा बदलाव
अब किसी भी महत्वपूर्ण UPI ट्रांजैक्शन API का रिस्पॉन्स टाइम अधिकतम 10 सेकंड होगा, जबकि पहले यह सीमा 30 सेकंड तक थी। इससे रीयल टाइम ट्रांजैक्शन पहले से ज्यादा तेज और स्मूद हो जाएंगे। खासकर दुकानदारों और बिजनेस यूजर्स के लिए यह बदलाव काफी फायदेमंद माना जा रहा है।
UPI के जरिए क्रेडिट लाइन से पेमेंट की सुविधा
नए नियमों के तहत यूजर्स को प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन या ओवरड्राफ्ट फंड्स के जरिए भी UPI से पेमेंट और विदड्रॉ करने की सुविधा दी जा रही है। 24 जनवरी 2026 के बाद इस सुविधा को लागू किया गया है और आगे अगस्त से संबंधित नियम पूरी तरह लागू होंगे। इससे उन लोगों को काफी मदद मिलेगी जिन्हें जरूरत के समय तुरंत अतिरिक्त फंड की आवश्यकता होती है।

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य
NPCI के अनुसार इन नए नियमों का उद्देश्य UPI सर्वर पर बढ़ते लोड को नियंत्रित करना, डिजिटल पेमेंट को अधिक सुरक्षित बनाना, ट्रांजैक्शन फेल्योर को कम करना और नई टेक्नोलॉजी के जरिए यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाना है। डिजिटल इंडिया के बढ़ते विस्तार को देखते हुए यह बदलाव भविष्य के लिए जरूरी माने जा रहे हैं।
यूजर्स और व्यापारियों के लिए जरूरी चेतावनी
अगर नए नियमों का पालन नहीं किया गया तो ऐप्स या बैंकों पर API बैन और पेनल्टी जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसलिए सभी UPI यूजर्स, दुकानदारों, फ्रीलांसर और नियमित डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों को इन बदलावों को समझकर अपनी भुगतान आदतों में जरूरी सुधार करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

यह लेख सामान्य जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है, इसलिए अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए NPCI या संबंधित बैंक की वेबसाइट जरूर देखें।
