नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने दिव्यांग (PwBD – Persons with Benchmark Disabilities) उम्मीदवारों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि अब से UPSC द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। इस फैसले को दिव्यांग अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अब तक दिव्यांग उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र चयन में कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। दूर-दराज के केंद्र, परिवहन की दिक्कतें और शारीरिक असुविधा जैसी समस्याएं आम थीं। UPSC के इस फैसले से लाखों अभ्यर्थियों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।
UPSC का आधिकारिक ऐलान
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सिविल सेवा परीक्षा, NDA, CDS, CAPF, इंजीनियरिंग सर्विसेज और अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं पर समान रूप से लागू होगा। PwBD श्रेणी के उम्मीदवार आवेदन करते समय जिस परीक्षा केंद्र को प्राथमिकता देंगे, आयोग उसे सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
UPSC के अनुसार, यह निर्णय दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए समान अवसर और सुगम परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
दिव्यांग उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान कई अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे—
दूर स्थित परीक्षा केंद्र
सार्वजनिक परिवहन की कमी
व्हीलचेयर या सहायक उपकरणों की व्यवस्था
समय से पहले केंद्र तक पहुंचने में परेशानी
इन सब कारणों से कई योग्य उम्मीदवार परीक्षा देने से वंचित रह जाते थे या मानसिक दबाव में रहते थे। UPSC का यह फैसला इन सभी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा।
दिव्यांग उम्मीदवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस नए नियम से PwBD उम्मीदवारों को कई स्तर पर लाभ मिलेगा—
यात्रा की परेशानी कम होगी
शारीरिक और मानसिक तनाव घटेगा
परीक्षा प्रदर्शन बेहतर होगा
अधिक उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो सकेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दिव्यांग उम्मीदवारों की भागीदारी को बढ़ाएगा और प्रशासनिक सेवाओं में समावेशिता को मजबूत करेगा।
आवेदन प्रक्रिया में क्या होगा बदलाव?
UPSC ने संकेत दिया है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्र प्राथमिकता से जुड़ा विकल्प और अधिक स्पष्ट किया जाएगा। PwBD अभ्यर्थियों को अपने दस्तावेज़ों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र पहले की तरह अपलोड करना होगा।
आयोग यह भी सुनिश्चित करेगा कि चुने गए परीक्षा केंद्र पर
रैंप
लिफ्ट
ग्राउंड फ्लोर कक्ष
अतिरिक्त समय (जहां लागू हो)
सहायक (Scribe) की सुविधा
उपलब्ध कराई जाए।
सामाजिक संगठनों और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
UPSC के इस फैसले का देशभर में स्वागत किया जा रहा है। दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इसे “गेम चेंजर” करार दिया है। कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर UPSC का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें सम्मान और समानता का अनुभव होगा।
एक PwBD उम्मीदवार ने कहा,
“यह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान की जीत है।”
पहले भी उठाए गए हैं कदम
UPSC पहले ही दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कई सहूलियतें दे चुका है, जैसे—
अतिरिक्त समय
लेखक (Scribe) की अनुमति
कम कट-ऑफ
आयु सीमा में छूट
अब पसंदीदा परीक्षा केंद्र का विकल्प जोड़कर आयोग ने अपनी समावेशी सोच को और मजबूत किया है।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है, बल्कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना को भी पूरी तरह प्रतिबिंबित करता है। इससे प्रशासनिक सेवाओं में विविधता और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
UPSC का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में उठाया गया मजबूत कदम है। मनपसंद परीक्षा केंद्र मिलने से दिव्यांग उम्मीदवारों को न सिर्फ सुविधा मिलेगी, बल्कि वे बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।
यह फैसला आने वाले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को और अधिक मानवीय, सुलभ और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

