नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2025:भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत पर लगने वाले टैरिफ (आयात कर) को जल्द ही 50 प्रतिशत से घटाकर 15 से 16 प्रतिशत करने वाला है। यह फैसला दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कमी के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन और निवेश के अवसरों में तेजी आने की संभावना है। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताओं के बाद अब यह समझौता अंतिम चरण में बताया जा रहा है।
व्यापारिक तनावों में कमी की उम्मीद
बीते कुछ वर्षों से भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक मसलों पर कई बार मतभेद सामने आए थे, जिनमें आयात-निर्यात शुल्क, कृषि उत्पादों की पहुंच और तकनीकी मानकों को लेकर विवाद शामिल थे। लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ दरों में कमी भारत की विनिर्माण और निर्यात इंडस्ट्री के लिए वरदान साबित हो सकती है। इससे भारत के टेक्सटाइल, फार्मा, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों की अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ेगी।
रिपोर्ट में दावा: जल्द होगा समझौता
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका एक “ट्रेड ऑप्टिमाइजेशन पैक्ट” (Trade Optimization Pact) पर काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए “विन-विन सिचुएशन” साबित हो सकता है।
इस समझौते के तहत न केवल टैरिफ कम किया जाएगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेड, डेटा सुरक्षा और निवेश को लेकर भी कई प्रावधान जोड़े जाएंगे। दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालय इस समझौते को लेकर औपचारिक घोषणा की तैयारी में जुटे हैं।
भारत के लिए क्या होंगे फायदे
1. निर्यात में तेजी:
अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। टैरिफ कम होने से भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।
2. रोज़गार के अवसर:
निर्यात बढ़ने के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर में लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
3. तकनीकी साझेदारी में वृद्धि:
रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी गहरी होगी।
4. FDI में इजाफा:
अमेरिकी निवेशक भारत में उत्पादन बढ़ाने और “मेक इन इंडिया” पहल के तहत अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित होंगे।
अमेरिका को भी मिलेगा फायदा
जहां भारत को इस समझौते से निर्यात में बढ़त मिलेगी, वहीं अमेरिका के लिए भी भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार साबित होगा।
अमेरिकी टेक, ऑटोमोबाइल, रक्षा और हेल्थकेयर कंपनियों को भारत में कारोबार विस्तार का मौका मिलेगा।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों की GDP पर सकारात्मक असर डाल सकता है। भारत के लिए यह “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” नीतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती देगा।
ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ प्रोफेसर आर.एस. मेहरा का कहना है कि,
“यदि अमेरिका वाकई भारत के टैरिफ को 15-16% तक घटाता है, तो यह पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धि होगी। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा और भारत-अमेरिका संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।”
वहीं दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की अर्थशास्त्री डॉ. रचना वर्मा के अनुसार,
“यह फैसला वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी अहम होगा। चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत को अमेरिका का यह कदम रणनीतिक सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।”
आगे की राह
सूत्रों की मानें तो आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच संयुक्त व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की घोषणा की जा सकती है। वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताई के बीच उच्च स्तरीय बैठक अगले महीने निर्धारित की गई है। इस समझौते के अमल में आने के बाद भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध एक नए युग में प्रवेश कर सकते हैं, जहां आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन तीनों को बढ़ावा मिलेगा।
अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने का फैसला न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूती देगा, बल्कि यह ग्लोबल ट्रेड इक्वेशन में भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
भारत के लिए यह अवसर “विकास और आत्मनिर्भरता” दोनों के रास्ते खोल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समझौता कब तक आधिकारिक रूप से लागू होता है और इसका भारतीय उद्योगों पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ता है।

