By: Vikash Kumar (Vicky)
वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क। अमेरिका इन दिनों भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में है। देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी और तेज हवाओं ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि करीब 5 लाख से अधिक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है, जबकि 11 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। कई राज्यों में आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, यह तूफान पिछले 153 वर्षों में सबसे भीषण माना जा रहा है। भारी बर्फबारी के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। न्यूयॉर्क, शिकागो, मैरीलैंड, मेन और बोस्टन सहित कई राज्यों में बर्फ की मोटी परत जम गई है, जिससे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली संकट गहराया
तेज हवाओं और बर्फ के भार से बिजली के खंभे और ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। पावर ग्रिड पर अत्यधिक दबाव के कारण लाखों घर अंधेरे में डूब गए हैं। बिजली कंपनियों की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण बहाली में समय लग रहा है। कई इलाकों में लोगों को हीटर बंद होने से ठंड में ठिठुरना पड़ रहा है।

हवाई सेवाएं ठप
बर्फीले तूफान के चलते 11 हजार से अधिक उड़ानों को रद्द किया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ देखी गई। हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से यात्रा स्थगित करने या वैकल्पिक तिथि चुनने की अपील की है।
सड़क और रेल यातायात प्रभावित
हाईवे पर बर्फ जमने से कई जगहों पर दुर्घटनाएं हुईं। प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है। कई स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद कर दिए गए हैं। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को भी सीमित कर दिया गया है।

153 साल में पहली बार अखबार नहीं छपा
भारी बर्फबारी के कारण वितरण व्यवस्था ठप हो गई, जिससे 153 साल के इतिहास में पहली बार एक प्रमुख अखबार का प्रिंट संस्करण प्रकाशित नहीं हो सका। यह घटना इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को दर्शाती है।
आपातकालीन सेवाएं सक्रिय
प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नेशनल गार्ड को कई प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। जरूरतमंदों के लिए अस्थायी आश्रय केंद्र बनाए गए हैं, जहां भोजन और गर्म कपड़ों की व्यवस्था की गई है।

आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तूफान का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। व्यापार, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से करोड़ों डॉलर का नुकसान होने की आशंका है। बीमा कंपनियों के पास दावों की संख्या बढ़ सकती है।
जलवायु परिवर्तन पर बहस
इस घटना के बाद एक बार फिर जलवायु परिवर्तन को लेकर बहस तेज हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि चरम मौसमी घटनाएं अब पहले की तुलना में अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं।

प्रशासन की अपील
अमेरिकी प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा न करने और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक हालात गंभीर बने रहने की चेतावनी दी है।
अमेरिका में आया यह भीषण बर्फीला तूफान न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है। लाखों लोग बिजली, परिवहन और आवश्यक सेवाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात सामान्य होने में समय लग सकता है।

