By: Vikash Kumar (Vicky)
उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों के संचालन के लिए नए मोटरयान नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों के तहत अब ऐसी सभी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य में चार पहिया वाहनों के संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण और लाइसेंस लेना होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, किराया प्रणाली को पारदर्शी बनाना और टैक्सी सेवाओं को नियमन के दायरे में लाना है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं। यात्रियों ने किराए में अचानक बढ़ोतरी, ड्राइवरों की पहचान की कमी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंता जताई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मोटरयान एग्रीगेटर नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।

नए नियमों के अनुसार राज्य में काम करने वाली सभी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों को परिवहन विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होगा। बिना लाइसेंस के किसी भी कंपनी को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सभी वाहनों और ड्राइवरों का पूरा रिकॉर्ड सरकार के साथ साझा करना होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक वाहन का वैध पंजीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ड्राइवरों के लिए भी पुलिस सत्यापन और वैध ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी किया गया है। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

नए नियमों के तहत किराया प्रणाली को भी नियंत्रित किया जाएगा। सरकार अधिकतम और न्यूनतम किराया सीमा तय कर सकती है, जिससे यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने की समस्या को रोका जा सके। कई बार पीक आवर या खराब मौसम के दौरान किराया कई गुना बढ़ जाने की शिकायतें सामने आती थीं। अब सरकार के हस्तक्षेप से इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण संभव होगा।
इसके साथ ही ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों को यात्रियों के लिए 24 घंटे की शिकायत निवारण व्यवस्था भी उपलब्ध करानी होगी। अगर किसी यात्री को ड्राइवर के व्यवहार, किराए या सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या होती है तो वह तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेगा। परिवहन विभाग भी इन शिकायतों की निगरानी करेगा।

योगी सरकार का मानना है कि इन नियमों से टैक्सी सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही पारंपरिक टैक्सी और ऑटो चालकों को भी प्रतिस्पर्धा में संतुलन मिलेगा। लंबे समय से पारंपरिक परिवहन संगठनों की ओर से यह मांग की जा रही थी कि ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों को भी समान नियमों के तहत संचालित किया जाए।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा फीचर्स भी अनिवार्य रूप से शामिल करने होंगे। जैसे कि इमरजेंसी बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप की पूरी जानकारी रिकॉर्ड करने की व्यवस्था। इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई कंपनी बिना लाइसेंस संचालन करती पाई गई तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और सेवा को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से ऐप आधारित परिवहन सेवाओं का ढांचा अधिक व्यवस्थित होगा। भारत के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के एग्रीगेटर नियम लागू किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में इन नियमों के लागू होने से टैक्सी सेवाओं का संचालन अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

हालांकि कुछ कंपनियों का मानना है कि नए नियमों के कारण संचालन लागत बढ़ सकती है, लेकिन सरकार का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना जरूरी है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। इससे जहां यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलने की उम्मीद है, वहीं परिवहन क्षेत्र में नियमों का बेहतर पालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

