By: Vikash Kumar ( Vicky )
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने देश के बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए Gen Z और Gen Alpha को विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में आज के बच्चों और युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता, राष्ट्रहित और नवाचार को लेकर युवाओं से अपील की। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उन पीढ़ियों के हाथों में है जो तकनीक के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी आत्मसात कर रही हैं।
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि कम उम्र में भी राष्ट्र और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया जा सकता है। साहिबजादों का साहस आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

पीएम मोदी ने कहा कि वीर बाल दिवस केवल इतिहास को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि हम देश को मजबूत, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाएंगे।
Gen Z और Gen Alpha पर पीएम मोदी का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि Gen Z और Gen Alpha वह पीढ़ियां हैं जो डिजिटल युग में जन्मी हैं और तकनीक को सहज रूप से समझती हैं। उन्होंने कहा कि यही पीढ़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स, स्पेस टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
उन्होंने कहा,
“आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं है, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। यही विकसित भारत की पहचान है।”
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवाओं की भूमिका
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को लोकल फॉर वोकल के मंत्र को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब युवा भारतीय उत्पादों पर गर्व करेंगे, तभी भारत आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा।
प्रधानमंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि वे पढ़ाई के साथ-साथ नवाचार, स्किल डेवलपमेंट और सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से संभव है।
तकनीक और संस्कृति का संतुलन जरूरी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे नई पीढ़ी को गर्व के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का युवा जब तकनीक में आगे बढ़ेगा और संस्कारों से जुड़ा रहेगा, तभी देश वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाएगा।
कार्यक्रम में दिखी युवाओं की ऊर्जा
भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और युवा प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें साहिबजादों के बलिदान और देशभक्ति की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के साथ संवाद भी किया और उनके सवालों के जवाब दिए। इस दौरान युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे और युवा उस भारत के निर्माता होंगे, जो आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र सेवा—यही तीन स्तंभ हैं जिन पर विकसित भारत की इमारत खड़ी होगी।
देशभर में मनाया गया वीर बाल दिवस
गौरतलब है कि वीर बाल दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थानों में साहिबजादों के बलिदान को याद किया गया और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल बच्चों और युवाओं के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक रहा।
