By: Vikash Kumar (Vicky)
विजया एकादशी 2026 का महत्व और तिथि
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है और फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली विजया एकादशी को सफलता, विजय और आत्मबल की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। साल 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इस बार विजया एकादशी पर सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जो पूजा और व्रत के फल को और अधिक प्रभावशाली माना जाता है।

विजया एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
विजया एकादशी को केवल जीत और सफलता का प्रतीक ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मानसिक शक्ति बढ़ाने वाला व्रत भी माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया व्रत व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है। कई लोग जीवन में चल रही समस्याओं से मुक्ति और मन की शांति के लिए भी इस व्रत का पालन करते हैं।

श्रीराम ने क्यों रखा था विजया एकादशी व्रत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया, तब भगवान श्रीराम ने वानर सेना के साथ लंका की ओर प्रस्थान किया। रास्ते में विशाल समुद्र को पार करना बड़ी चुनौती थी। तब श्रीराम ने वकदाल्भ्य मुनि से उपाय पूछा। मुनि ने उन्हें फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। कहा जाता है कि श्रीराम ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि से किया, जिसके प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग मिला और अंततः रावण पर विजय प्राप्त हुई। इसी कारण इस एकादशी को विजय दिलाने वाली एकादशी माना जाता है।

विजया एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार विजया एकादशी व्रत के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। श्रीराम द्वारा व्रत करने की कथा भक्तों को यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धा, धैर्य और धर्म का मार्ग अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। इस दिन कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है और मान्यता है कि श्रीहरि भक्तों की पूजा को शीघ्र स्वीकार करते हैं।

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि विस्तार से
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार विजया एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से होती है। इस दिन स्वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश बनाकर उसे जल से भरकर वेदिका पर स्थापित किया जाता है। कलश के नीचे सात प्रकार के अनाज और ऊपर जौ रखे जाते हैं तथा उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की जाती है। एकादशी के दिन स्नान के बाद धूप, दीप, नैवेद्य और नारियल से भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। भक्त पूरे दिन भक्ति में समय बिताते हैं और रात में जागरण करते हैं। द्वादशी के दिन स्नान के बाद कलश का दान ब्राह्मण को करने की परंपरा है।

विजया एकादशी के दिन बनने वाले शुभ संयोग
इस वर्ष विजया एकादशी पर सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है। इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग नए कार्यों की शुरुआत और आध्यात्मिक साधना के लिए लाभकारी माना गया है।
विजया एकादशी व्रत के लाभ और मान्यताएं
धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों में विजय प्राप्त होती है, मानसिक शांति मिलती है और आत्मबल मजबूत होता है। साथ ही यह व्रत व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों से दूर रखता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का मार्ग बनाता है। कई लोग इसे सफलता और शुभ फल प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से करते हैं।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत से पहले अपनी परंपरा और विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
