By: Vikash Kumar (Vicky)
Vinayak Chaturthi Vrat Katha in Hindi: हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि प्रथम पूजनीय भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। फाल्गुन मास की शुक्ल चतुर्थी इस वर्ष 21 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और कथा पाठ करने से बुद्धि, समृद्धि, सौभाग्य और विघ्नों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर होगा और इसका समापन 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर विनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत 21 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

विनायकी गणेश चतुर्थी का महत्व
Ganesha को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और सुख-समृद्धि के देवता कहा जाता है। प्रत्येक मास की शुक्ल चतुर्थी को इनकी विशेष आराधना की जाती है, जिसे विनायकी चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी का व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शास्त्रों में चतुर्थी तिथि को गणेश जी की अधिष्ठाता तिथि माना गया है। इसलिए इस दिन पूजा के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी बताया गया है।

विनायक चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय Shiva और Parvati नर्मदा नदी के तट पर विराजमान थे। शांत वातावरण और बहते जल की मधुर ध्वनि के बीच माता पार्वती ने भगवान शिव से चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की। शिव जी ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली, लेकिन वहां जीत-हार का निर्णय करने वाला कोई साक्षी मौजूद नहीं था।

तब भगवान शिव ने तिनकों से एक बालक का पुतला बनाकर उसमें प्राण-प्रतिष्ठा कर दी और उसे साक्षी बनाकर निष्पक्ष निर्णय देने को कहा। शिव और पार्वती के बीच चौपड़ का खेल तीन बार खेला गया और तीनों बार माता पार्वती विजयी रहीं। किंतु जब निर्णय का समय आया तो उस बालक ने शिव जी को विजेता घोषित कर दिया।
यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो उठीं और उन्होंने बालक को श्राप दिया कि वह लंगड़ा होकर कीचड़ में पड़ा रहेगा। बालक ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए क्षमा याचना की। तब माता पार्वती ने कहा कि भविष्य में जब नाग कन्याएं वहां गणेश पूजन के लिए आएंगी, तब वे उसे गणेश व्रत की विधि बताएंगी। उस व्रत के प्रभाव से उसके कष्ट दूर हो जाएंगे।

एक वर्ष बाद नाग कन्याएं वहां आईं और बालक को गणेश व्रत की विधि बताई। उसने लगातार 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत और पूजन किया। उसकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर Ganesha प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। बालक ने कैलाश पर्वत तक पहुंचने की शक्ति मांगी। गणेश जी ने उसे वरदान दिया और वह स्वस्थ होकर कैलाश पहुंच गया।
वहां उसने पूरी कथा भगवान शिव को सुनाई। उधर माता पार्वती शिव जी से नाराज थीं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए शिव जी ने भी 21 दिनों तक विनायक व्रत किया, जिससे देवी की नाराजगी दूर हो गई। बाद में माता पार्वती ने भी यह व्रत किया और 21वें दिन उनके पुत्र कार्तिकेय उनसे मिलने आए। तभी से यह व्रत समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है।

व्रत और पूजा विधि
विनायकी चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। दूर्वा, मोदक, लाल फूल और अक्षत अर्पित करें। गणेश मंत्रों का जाप करें और अंत में व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। शाम के समय आरती कर प्रसाद वितरण करें। धार्मिक मान्यता है कि 21 दिनों तक निरंतर श्रद्धा से गणेश व्रत करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।

क्या है इस व्रत का आध्यात्मिक संदेश
विनायकी चतुर्थी केवल व्रत नहीं बल्कि धैर्य, सत्य और निष्पक्षता का संदेश भी देती है। यह कथा सिखाती है कि भूल स्वीकार कर सच्चे मन से भक्ति करने पर भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। तिथि और पूजा विधि के लिए अपने स्थानीय पंचांग या ज्ञानी आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

