By: Vikash, Mala Mandal
भारत में विटामिन-डी की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश की लगभग 70–80 प्रतिशत आबादी किसी न किसी स्तर पर विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है। विटामिन-डी, जिसे “सनशाइन विटामिन” भी कहा जाता है, शरीर में कैल्शियम के अवशोषण, हड्डियों की मजबूती और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

हालांकि शरीर सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी बनाता है, लेकिन बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस में रहना और प्रदूषण के कारण लोगों में इसकी कमी तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि आजकल बड़ी संख्या में लोग विटामिन-डी सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सप्लीमेंट लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके से लेना भी उतना ही जरूरी है। सही तरीके अपनाकर विटामिन-डी का अब्जॉर्प्शन यानी अवशोषण 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

फैट के साथ लें विटामिन-डी
विटामिन-डी एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, यानी यह वसा के साथ बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि इसे खाली पेट लेने के बजाय भोजन के साथ या भोजन के बाद लें, खासकर ऐसे भोजन के साथ जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो जैसे दूध, दही, घी या नट्स।
सुबह या दिन में लें सप्लीमेंट
कुछ रिसर्च में पाया गया है कि सुबह या दिन के समय विटामिन-डी लेने से शरीर इसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल करता है। रात में लेने से नींद के पैटर्न पर असर पड़ सकता है, इसलिए दिन का समय बेहतर माना जाता है।

कैल्शियम और मैग्नीशियम का रखें संतुलन
विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है, लेकिन इसके लिए मैग्नीशियम का संतुलन भी जरूरी होता है। अगर शरीर में मैग्नीशियम की कमी होगी तो विटामिन-डी सही तरीके से काम नहीं करेगा। इसलिए संतुलित आहार लेना जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें डोज
विटामिन-डी की अधिक मात्रा भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के हाई डोज लेना सही नहीं है। नियमित जांच के बाद ही उचित मात्रा में सप्लीमेंट लेना चाहिए।

धूप का संपर्क जरूरी
भले ही आप सप्लीमेंट ले रहे हों, लेकिन प्राकृतिक स्रोत यानी सूर्य की रोशनी से मिलने वाला विटामिन-डी सबसे प्रभावी होता है। रोजाना 15–20 मिनट धूप में रहना शरीर के लिए फायदेमंद है।
कॉफी और चाय का कम करें सेवन
अत्यधिक कैफीन का सेवन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सप्लीमेंट लेने के आसपास चाय या कॉफी से दूरी रखना बेहतर होता है।

नियमितता है सबसे जरूरी
विटामिन-डी का असर तभी दिखता है जब इसे नियमित रूप से लिया जाए। अनियमित सेवन से शरीर में इसका स्तर संतुलित नहीं रह पाता।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, महिलाएं, गर्भवती महिलाएं, मोटापे से ग्रस्त लोग और वे लोग जो लंबे समय तक धूप से दूर रहते हैं, उनमें विटामिन-डी की कमी का खतरा अधिक होता है।

कमी के लक्षण
विटामिन-डी की कमी होने पर शरीर में थकान, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

विटामिन-डी शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन इसका सही तरीके से सेवन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आप सप्लीमेंट ले रहे हैं तो ऊपर बताए गए आसान उपाय अपनाकर इसके अवशोषण को 30–50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही संतुलित आहार और नियमित धूप का संपर्क आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा।

