By: Vikash Kumar (Vicky)
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर जानलेवा निपाह वायरस (Nipah Virus) की पुष्टि ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में निपाह वायरस के दो मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन हाई अलर्ट मोड में आ गया है। यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और इसका संक्रमण बेहद घातक माना जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को हरसंभव मदद देने का भरोसा दिया है।

क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों और सूअरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस पहली बार वर्ष 1999 में मलेशिया में सामने आया था। भारत में निपाह वायरस के मामले पहले भी केरल और पश्चिम बंगाल में देखे जा चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, जिससे संक्रमण की रफ्तार तेज हो जाती है।
बंगाल में कहां मिले मामले?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल में सामने आए दोनों मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है। मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है।
राज्य सरकार ने संबंधित जिलों में सर्विलांस बढ़ाने, अस्पतालों को अलर्ट पर रखने और मेडिकल स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार का एक्शन प्लान
निपाह वायरस के मामलों की पुष्टि के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क किया है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम
टेस्टिंग किट
दवाइयां और मेडिकल उपकरण
NCDC और ICMR की तकनीकी सहायता
उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्र ने राज्य सरकार से कहा है कि संक्रमण को फैलने से रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए।

निपाह वायरस के लक्षण
आमतौर पर संक्रमण के 5 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। इनमें शामिल हैं—
तेज बुखार
सिरदर्द
उल्टी और मतली
सांस लेने में दिक्कत
मानसिक भ्रम
बेहोशी या कोमा
गंभीर मामलों में यह वायरस एन्सेफलाइटिस (दिमाग की सूजन) का कारण बन सकता है, जिससे मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
इलाज और रोकथाम
फिलहाल निपाह वायरस का कोई पुख्ता टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। मरीजों को लक्षणों के आधार पर उपचार दिया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि
संदिग्ध मरीजों को तुरंत आइसोलेट किया जाए
हाथों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए
कच्चे फल, खासकर गिरे हुए फल खाने से बचें
बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से परहेज करें
स्वास्थ्य विभाग की अपील
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से घबराने की जरूरत न होने, लेकिन सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें और अफवाहों से बचें।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते अगर संक्रमण की पहचान और आइसोलेशन कर लिया जाए तो निपाह वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। पहले के अनुभवों से सीख लेते हुए सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां इस बार ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं।
पहले भी बंगाल में मिल चुके हैं मामले
यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस सामने आया हो। इससे पहले भी राज्य में इसके मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि समय पर कार्रवाई से बड़े स्तर पर संक्रमण को रोका गया था।
इस बार भी प्रशासन उसी रणनीति पर काम कर रहा है।
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि ने एक बार फिर स्वास्थ्य तंत्र की परीक्षा ले ली है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार की तत्परता, मेडिकल टीमों की सक्रियता और जनता की सतर्कता से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होगा।

