By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर, 24 मार्च 2026: विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर देवघर जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिला यक्ष्मा केंद्र, देवघर में “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच सुनिश्चित करना और रोग के पूर्ण उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास को गति देना है।

टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगी नई दिशा
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की विभिन्न गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत जिले के सभी संवेदनशील वर्गों (Vulnerable Population) की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके साथ ही जिले के 640 ऐसे गांवों की पहचान की गई है, जिन्हें “हाई रिस्क विलेज” के रूप में चिन्हित किया गया है। इन गांवों में 14 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों की अनिवार्य टीबी जांच की जाएगी। यह कदम संक्रमण की प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

आयुष्मान आरोग्य शिविर और आधुनिक सुविधाएं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विशेष आरोग्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां लोगों की मुफ्त स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार द्वारा जिले को दो हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई गई है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में भी आसानी से जांच संभव हो सकेगी। इन जांचों की रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी, जिससे अभियान की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जा सके।

जनभागीदारी से ही संभव होगा टीबी उन्मूलन
कार्यक्रम में जनभागीदारी को अभियान की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि जब तक आम जनता इस अभियान से नहीं जुड़ेगी, तब तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। इस दिशा में “निक्षय मित्र” योजना के तहत समाज के सक्षम लोगों को टीबी मरीजों को गोद लेने और उन्हें पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे मरीजों के उपचार में सुधार होगा और उन्हें आवश्यक पोषण मिल सकेगा।
विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं झारखंड डॉ. बीरेन्द्र प्रसाद सिंह और डॉ. चन्द्र किशोर शाही ने टीबी मुक्त भारत अभियान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीबी एक पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते समय पर जांच और नियमित दवा ली जाए। आईएमए अध्यक्ष डॉ. डी. तिवारी ने भी अपने संबोधन में कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाकर ही इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

जागरूकता और सम्मान समारोह का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। लेखन प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके अलावा टीबी उन्मूलन में योगदान देने वाले 2 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), 18 साहियाओं और 4 टीबी चैंपियनों को भी पुरस्कृत किया गया। इस प्रकार के सम्मान कार्यक्रम से स्वास्थ्य कर्मियों और समाज के अन्य लोगों को प्रेरणा मिलती है, जिससे वे इस अभियान में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकें।
स्वास्थ्य विभाग की टीम रही मौजूद
इस अवसर पर कई वरिष्ठ चिकित्सक और स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रमोद शर्मा, जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव, उपाधीक्षक सदर अस्पताल डॉ. सुषमा वर्मा, आईएमए सचिव डॉ. गौरी शंकर सहित कई विशेषज्ञ शामिल थे। इसके अलावा जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. संचयन ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे हम सभी को मिलकर पूरा करना है।

टीबी उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम
देवघर में शुरू हुआ यह 100 दिवसीय अभियान न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन सकता है। यदि इस अभियान में सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो टीबी मुक्त भारत का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।
सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आम जनता के संयुक्त प्रयास से ही इस गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा, बल्कि समाज को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर भी अग्रसर करेगा।

