By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। विश्व जल दिवस के अवसर पर जिले में जल महोत्सव कार्यक्रम के तहत एक भव्य जिला स्तरीय आयोजन समाहरणालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा ने की। इस अवसर पर जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों को पानी की महत्ता के प्रति जागरूक करना था। आयोजन में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, विभिन्न प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, मुखिया, मास्टर जल सहिया, जल सहिया एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि पानी के बिना जीवन की कल्पना असंभव है और इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जल संचयन के उपायों को अपनाएं और पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सजग रहें।
उन्होंने आगे कहा कि जिले में हर घर नल जल योजना के तहत कार्यों को और अधिक गति देने की आवश्यकता है, ताकि प्रत्येक घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने पंचायत स्तर पर जलकर प्रणाली लागू करने की बात कही, जिससे जल प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

जल स्रोतों की जियोटैगिंग और सफाई अभियान पर विशेष जोर
बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिले के सभी जल स्रोतों की जियोटैगिंग करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जियोटैगिंग के माध्यम से जल स्रोतों का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा, जिससे उनके संरक्षण और पुनर्जीवन के कार्यों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
इसके अलावा, उन्होंने पंचायतों में ‘थीम बेस्ड’ सफाई अभियान चलाने पर जोर दिया। इस अभियान के तहत तालाबों, नदियों, सार्वजनिक स्थलों और खेल के मैदानों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल स्रोत न केवल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

जल शपथ के माध्यम से जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों को जल शपथ दिलाई गई। इस शपथ के माध्यम से सभी को जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया। जल शपथ का उद्देश्य लोगों के मन में जल के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को बढ़ाना था।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मास्टर जल सहिया, जल सहिया, पंचायत के मुखिया, कनीय अभियंता एवं अन्य कर्मियों को उपायुक्त द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और अन्य लोगों को भी इससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
सामुदायिक भागीदारी से ही संभव है जल संरक्षण
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। जब तक समाज का हर व्यक्ति इस दिशा में सक्रिय भूमिका नहीं निभाएगा, तब तक जल संकट की समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति शिक्षित करने पर भी जोर दिया।

विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता फैलाने का एक माध्यम बना, बल्कि जल संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ। प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णय और दिए गए निर्देश आने वाले समय में जिले में जल प्रबंधन को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

