By: Vikash Kumar (Vicky)
15 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का विशेष संयोग भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज के दिन व्रत, जप, अभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। जो श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं, उन्हें मनचाहा फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं 15 फरवरी 2026 का पूरा दैनिक पंचांग, शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल का समय।

आज की तिथि और वार
पंचांग के अनुसार 15 फरवरी 2026 को फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि शाम 05 बजकर 05 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होगा। महाशिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी तिथि में किया जाता है, इसलिए आज का दिन शिवभक्तों के लिए विशेष पुण्यदायी है। आज रविवार का दिन है, जो सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। रविवार और शिवरात्रि का यह संयोग अत्यंत शुभ फलदायक माना गया है।

नक्षत्र और योग
आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शाम 07 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र का आरंभ होगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को स्थिर और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है, जबकि श्रवण नक्षत्र भगवान विष्णु से संबंधित है और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। आज व्यातीपात योग रात्रि 02 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, इसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा। व्यातीपात योग में सावधानी से कार्य करने की सलाह दी जाती है, जबकि वरीयान योग शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।
करण का विवरण
आज वणिज करण शाम 05 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विष्टि करण सुबह 05 बजकर 24 मिनट तक प्रभावी रहेगा और फिर शकुनि करण प्रारंभ होगा। पंचांग में करण का विशेष महत्व होता है और शुभ कार्यों में इसका विचार करना आवश्यक माना जाता है।

राहुकाल और शुभ मुहूर्त
रविवार के दिन राहुकाल सामान्यतः शाम के समय माना जाता है। आज राहुकाल लगभग शाम 04:30 बजे से 06:00 बजे तक रह सकता है। इस अवधि में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। शिव पूजन के लिए रात्रि का समय विशेष फलदायी रहेगा। विशेषकर निशीथ काल में भगवान शिव का अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है।

महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

यह पंचांग सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न स्थानों के अनुसार तिथि, नक्षत्र और राहुकाल के समय में थोड़ा अंतर संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

