Yam Panchak 2025 in Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास में धनतेरस से भाई दूज तक चलने वाला समय बेहद पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे यम पंचक कहा जाता है। यह अवधि लगभग पांच दिनों तक रहती है और इस दौरान यमराज, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अन्य देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 2025 में यम पंचक की शुरुआत 18 अक्टूबर 2025 यानी धनतेरस के दिन से होगी और इसका समापन 22 अक्टूबर 2025 को भाई दूज के दिन होगा।
इस पंचक का संबंध सीधे दिवाली पर्व से है। दिवाली के पांचों दिनों – धनतेरस, रूप चौदस (नरक चतुर्दशी), दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज – के दौरान विशेष धार्मिक महत्व होता है। हर दिन अलग-अलग देवताओं की आराधना की जाती है और इन सभी दिनों को यमराज से जुड़े विशेष कर्मों से भी जोड़ा गया है।
यम पंचक का अर्थ और महत्व:
“यम पंचक” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “यम” यानी मृत्यु के देवता यमराज, और “पंचक” यानी पांच दिनों का काल। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पांच दिनों में यमराज पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और उनके साथ अन्य पांच देव शक्तियों की उपस्थिति मानी जाती है। इसलिए इस समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए और शुभ कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
यम पंचक के पांच दिन और उनका महत्व:
1. धनतेरस (यम दीपदान): इस दिन भगवान धन्वंतरि और यमराज की पूजा की जाती है। शाम को दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज का पूजन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
2. रूप चौदस (नरक चतुर्दशी): इस दिन शरीर और मन की शुद्धि का दिन माना जाता है। प्रातः स्नान करके पापों से मुक्ति की कामना की जाती है।
3. दीपावली: इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घर-आंगन को रोशनी से सजाकर समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है।
4. गोवर्धन पूजा: यह दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा और अन्नकूट का आयोजन किया जाता है।
5. भाई दूज: इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं। इस दिन यमराज और यमुना जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।
यम पंचक के दौरान क्या करें:
रोजाना सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और यमराज की पूजा करें।
संध्या के समय दक्षिण दिशा में दीपदान अवश्य करें।
जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या धन का दान करें।
घर की सफाई और दीप सज्जा से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
यम पंचक के दौरान क्या न करें:
इस अवधि में किसी भी नए कार्य या यात्रा की शुरुआत न करें।
अनावश्यक वाद-विवाद या क्रोध से बचें।
झूठ बोलने या किसी का अपमान करने से परहेज करें।
दिवाली से यम पंचक का खास संबंध:
दिवाली के पांचों दिन यम पंचक काल के अंतर्गत आते हैं। कहा जाता है कि इस अवधि में यमराज स्वयं अपने दूतों को पृथ्वी पर भेजते हैं ताकि वे अच्छे कर्म करने वालों को आशीर्वाद दे सकें। यही कारण है कि धनतेरस से भाई दूज तक दीपदान, पूजन और दान का विशेष महत्व बताया गया है। यम पंचक 2025 धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक रहेगा। यह अवधि न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है बल्कि कर्म सुधार और पुण्य अर्जन का उत्तम अवसर भी है। इस दौरान भगवान यमराज, माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या निर्णय से पहले अपने पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें।

