
लापरा गांव, यमुना नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने लापरा गांव की स्थिति को भयावह बना दिया है। बाढ़ के चलते यहां के खेत डूब चुके हैं, रास्ते टूट गए हैं, पशुधन भूख और पानी के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी ठप हो गई है। ग्रामीण सरकारी सहायता की राह देख रहे हैं लेकिन मदद अब तक नाकाफी साबित हो रही है।
फसलें जलमग्न, किसानों को भारी नुकसान
लापरा गांव के किसान इस बार रबी और खरीफ दोनों सीज़न की फसल पर निर्भर थे। लेकिन यमुना नदी के उफान ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। धान, मक्का और सब्ज़ियों की सैकड़ों एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज़ लेकर खेती की थी और अब फसल बर्बाद होने से उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।
किसान रामेश्वर यादव बताते हैं, “पानी ने खेतों को ऐसे घेर लिया कि कुछ भी बचाने का मौका नहीं मिला। अब हमें न तो मुआवज़ा मिल रहा है और न ही अगले सीज़न की बुआई के लिए बीज और खाद की कोई व्यवस्था की गई है।”
टूटे रास्ते और बर्बाद आवागमन
बाढ़ का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा। गांव को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते भी टूट गए हैं। कई जगह कच्चे और पक्के दोनों प्रकार के मार्ग बह गए हैं। इससे ग्रामीणों का आना-जाना मुश्किल हो गया है।
स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज़ाना कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, लेकिन कई बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई है।
पशुधन पर संकट: चारा और पानी की भारी किल्लत
लापरा गांव में ज्यादातर लोग पशुपालन से भी जुड़े हैं। बाढ़ ने चारे की भारी किल्लत खड़ी कर दी है। चारे के भंडार बह गए और गोशालाओं में पानी भर गया। कई पशु बीमार हो गए हैं और उनके इलाज के लिए पशु चिकित्सकों की टीम अब तक नहीं पहुंच पाई है।

ग्रामीणों की मजबूरी: सरकारी मदद का इंतज़ार

ग्रामीणों की मजबूरी: सरकारी मदद का इंतज़ार
गांव के लोग सरकारी राहत और मुआवज़े की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ जगह से खाद्यान्न और दवाइयां पहुंची हैं, लेकिन वह नाकाफी हैं। पंचायत और प्रशासन का कहना है कि मदद की प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत की ज़रूरत है।
गांव की सरपंच मीरा देवी का कहना है, “हमने जिला प्रशासन को कई बार सूचित किया, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। यदि बांधों की मरम्मत और नदी की धारा को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।”
शिक्षा और स्वास्थ्य पर गहरा असर
लापरा गांव में बाढ़ ने केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक ढांचे को भी कमजोर कर दिया है। प्राथमिक विद्यालय बंद पड़े हैं और बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से भी वंचित हैं। वहीं स्वास्थ्य केंद्र में दवाइयों और स्टाफ की कमी है।
सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती
यह स्थिति प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। राहत शिविरों की कमी, चिकित्सा सुविधाओं की अनुपलब्धता और खराब संचार व्यवस्था ने संकट को और गहरा कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते नदी के तटबंध मजबूत नहीं किए गए और स्थायी सिंचाई व निकासी प्रणाली नहीं बनाई गई, तो यह समस्या हर साल सामने आएगी।
लापरा गांव को चाहिए स्थायी समाधान
यमुना की बाढ़ से तबाह लापरा गांव एक बार फिर से अपने पुनर्वास और राहत की आस लगाए बैठा है। किसानों को मुआवज़ा, बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था, पशुओं के लिए चारा और पीने के पानी की सुविधा, और ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आश्रय ही इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


