लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, SIR सर्वे में पकड़े गए रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठियों को केवल पहचान कर निकालना ही नहीं, बल्कि उनकी फिंगरप्रिंट और फेशियल-स्कैन समेत एक विस्तृत बायोमेट्रिक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। ये डेटाबेस देश भर में साझा किया जाएगा ताकि कोई उसे फर्जी दस्तावेजों के सहारे फिर से प्रवेश न कर सके।

सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए है। SIR सर्वे के दौरान पकड़े गए लोगों को अस्थाई डिटेंशन-सेंटर में रखा जाएगा और सत्यापन के बाद उन्हें देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।
ऊपर से, योगी सरकार ने स्थानीय निकायों — 17 नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे हर संदिग्ध विदेशी नागरिक की सूची तैयार करें। इसके अंतर्गत उन सभी विदेशी नागरिकों की पहचान, दस्तावेज, पता व संपर्क नंबर मांगना शामिल है। सरकार का इरादा है कि फर्जी पहचानपत्रों और फर्जी वोटर-लिस्ट का सफाया हो।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि SIR सर्वे के दौरान कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बूथ-स्तर पर फर्जी वोटरों, घुसपैठियों की पहचान व सत्यापन प्राथमिकता में है। राज्य में लोकतंत्र की शुद्धता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार और नागरिक दोनों की है।
यह कदम पंचायत, नगरपालिका व अन्य चुनावों से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी फर्जी मतदाता या अवैध निवासिए को मतदाता सूची में जगह न मिले। ऐसे में SIR सर्वे के तहत बनाया जाने वाला बायोमेट्रिक डेटाबेस, डिटेंशन-सेंटर और डिपोर्टेशन का तंत्र, प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवास को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हालाँकि, इस योजना को लेकर विपक्ष की ओर से भी सवाल उठे हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि SIR सर्वे के नाम पर दरअसल NRC जैसा अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधार जैसी राष्ट्रीय पहचान प्रणाली को नज़रअंदाज़ कर, फिंगरप्रिंट-आधारित सर्वे पर भरोसा करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों ने SIR सर्वे के दौरान काम किया है, उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके जवाब में स्पष्ट किया है कि राज्य में कानून और सुशासन बहाल करने के लिए यह कदम ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, कानूनी नागरिकता और अवैध प्रवास रोकना हर नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है।
इस तरह, SIR सर्वे में पकड़े गए अवैध घुसपैठियों के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया यह “फूल-प्रूफ प्लान” — बायोमेट्रिक डेटाबेस + डिटेंशन-सेंटर + डिपोर्टेशन मॉडल — उत्तर प्रदेश को अवैध प्रवासियों के लिये “नो-एंट्री” जोन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

