By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी होने के बाद इस बार बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा कॉपियों की जांच में पारम्परिक तकनीक को बदलने के कारण कई योग्य विद्यार्थियों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्कूल परिसरों तक छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

छात्रों का कहना है कि इस बार कॉपियों के मूल्यांकन में नई तकनीक और डिजिटल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसकी जानकारी पहले से स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। कई विद्यार्थियों का दावा है कि जिन विषयों में उन्हें हमेशा अच्छे अंक मिलते रहे, उन्हीं विषयों में इस बार अपेक्षा से काफी कम नंबर आए हैं।
परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र बोर्ड कार्यालय और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। कई छात्र पुनर्मूल्यांकन और कॉपी जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि कॉपियों की जांच किस मानक पर की गई।

इसी बीच छात्रों ने बोर्ड के सामने छह बड़े सवाल रखे हैं और उनका स्पष्ट जवाब मांगा है। छात्रों का कहना है कि जब तक बोर्ड इन सवालों का जवाब नहीं देता, तब तक मूल्यांकन प्रक्रिया पर संदेह बना रहेगा।
स्टूडेंट्स के छह बड़े सवाल
पहला सवाल: क्या इस बार कॉपियों के मूल्यांकन का तरीका पहले से अलग था? अगर हां, तो इसकी जानकारी छात्रों को पहले क्यों नहीं दी गई?
दूसरा सवाल:क्या डिजिटल मूल्यांकन या AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया? यदि किया गया तो उसकी निगरानी कौन कर रहा था?
तीसरा सवाल:जिन छात्रों के प्री-बोर्ड और स्कूल टेस्ट में लगातार अच्छे अंक थे, उनके बोर्ड में कम नंबर क्यों आए?
चौथा सवाल:क्या परीक्षकों को नई मूल्यांकन प्रणाली की उचित ट्रेनिंग दी गई थी?
पांचवां सवाल:क्या बोर्ड छात्रों को उनकी जांची गई उत्तर पुस्तिका देखने का अवसर देगा?
छठा सवाल:पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बोर्ड क्या कदम उठाएगा?

छात्रों का कहना है कि ये सवाल केवल कुछ विद्यार्थियों के नहीं बल्कि हजारों छात्रों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं। कई अभिभावकों ने भी बोर्ड से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि एक परीक्षा का परिणाम विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा होता है, ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन यदि उसे बिना पर्याप्त तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देश के लागू किया जाए तो छात्रों में भ्रम और असंतोष पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड को मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत गाइडलाइन सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।

कुछ शिक्षकों ने भी माना कि इस बार कॉपी जांच के दौरान कई नए नियम लागू किए गए थे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय बोर्ड प्रशासन के हाथ में होता है। वहीं, कई स्कूलों के प्रिंसिपल ने छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की सलाह दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बहस जारी है। कई छात्रों ने अपने मार्क्स और पुराने प्रदर्शन की तुलना साझा करते हुए बोर्ड पर सवाल उठाए हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्हें टॉप कॉलेजों में एडमिशन को लेकर अब चिंता सता रही है क्योंकि कम अंकों का सीधा असर उनके करियर पर पड़ सकता है।

हालांकि बोर्ड की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बोर्ड जल्द ही छात्रों की शिकायतों की समीक्षा कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि बोर्ड पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर सकता है।

फिलहाल छात्र और अभिभावक बोर्ड से स्पष्ट जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक बड़ा रूप ले सकता है यदि छात्रों की शंकाओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया।
अब सभी की नजर बोर्ड प्रशासन पर टिकी है कि वह छात्रों के इन छह सवालों का क्या जवाब देता है और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे विवाद को कैसे शांत करता है

