By: Mala Mandal
हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी समय माना जाता है। इस विशेष माह में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास के दौरान किए गए पुण्य कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है 33 मालपुओं का दान, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ और फलदायी बताया गया है।

इस साल अधिकमास की शुरुआत 17 मई 2026 से हुई है और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा। इस पूरे महीने को पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान की गई पूजा और दान से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
क्यों खास माना जाता है अधिकमास?
हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य संक्रांति के बिना एक अतिरिक्त चंद्र मास आता है तो उसे अधिकमास कहा जाता है। यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। धार्मिक दृष्टि से यह आत्मशुद्धि, तप, दान और भक्ति का विशेष समय माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि अधिकमास में किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दौरान लोग पूजा-पाठ, व्रत, गीता पाठ, श्रीहरि नाम जप और दान-पुण्य जैसे कार्य करते हैं।

33 मालपुओं का दान क्यों किया जाता है?
पद्म पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में अधिकमास के दौरान 33 मालपुओं के दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को मालपुए अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए इस महीने में मालपुए बनाकर पहले भगवान को भोग लगाया जाता है और फिर उनका दान किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 33 मालपुओं की संख्या का संबंध 33 कोटि देवी-देवताओं से माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि 33 मालपुओं का दान करने से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संख्या 33 के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य
सनातन धर्म में 33 संख्या को अत्यंत शुभ और दिव्य माना गया है। शास्त्रों में 33 कोटि देवताओं का उल्लेख मिलता है। कई विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ 33 प्रकार की दिव्य शक्तियों से है, जिनमें 12 आदित्य, 11 रुद्र, 8 वसु और 2 अश्विनी कुमार शामिल हैं।
मान्यता है कि 33 मालपुओं का दान इन सभी देव शक्तियों को समर्पित माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है, पितरों का आशीर्वाद मिलता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

अधिकमास में मालपुआ दान करने के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में 33 मालपुओं का दान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे आर्थिक समस्याओं में राहत मिल सकती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कहा जाता है कि यह दान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का माध्यम भी माना जाता है।
कई लोग मानते हैं कि इस दान से पितृ दोष और ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी कम हो सकते हैं। साथ ही घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

33 मालपुओं का दान कैसे करें?
शास्त्रों में बताया गया है कि अधिकमास के दौरान स्नान और पूजा के बाद शुद्ध घी या तेल में बने 33 मालपुए तैयार करने चाहिए। पहले भगवान विष्णु को भोग लगाएं। इसके बाद कांसे या किसी पवित्र पात्र में रखकर ब्राह्मण, मंदिर या जरूरतमंद लोगों को दान करें।
दान करते समय भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। कई लोग इस दौरान विष्णु सहस्रनाम और श्रीहरि मंत्र का जाप भी करते हैं।

किन बातों का रखें ध्यान?
अधिकमास में दान-पुण्य करते समय मन में श्रद्धा और सेवा भाव होना बेहद जरूरी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिखावे के लिए किया गया दान पूर्ण फल नहीं देता। इसलिए सच्चे मन और भक्ति भाव से किया गया दान ही शुभ माना जाता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और लोक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और मान्यताओं के अनुसार नियमों में अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य को करने से पहले विद्वान या आचार्य की सलाह अवश्य लें।

