दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानीवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। छठ महापर्व के अवसर पर 27 अक्टूबर को दिल्ली सरकार ने सरकारी अवकाश की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व नारी शक्ति, स्वच्छता और सूर्य उपासना का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। छठ पूजा को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि “छठ पर्व भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह त्योहार अनुशासन, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन का संदेश देता है। दिल्ली सरकार ने इस दिन सभी दफ्तरों और सरकारी संस्थानों में अवकाश घोषित किया है ताकि श्रद्धालु अपनी परंपराओं के साथ यह पर्व मना सकें।”
उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार के सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि छठ पूजा से पहले घाटों की सफाई, लाइटिंग, जल व्यवस्था, और सुरक्षा इंतज़ामों को पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के यमुना तट, कालिंदी कुंज, वज़ीराबाद, मयूर विहार, सोनिया विहार, और द्वारका जैसे प्रमुख घाटों पर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
घाटों पर विशेष इंतज़ाम:
दिल्ली सरकार के नगर निगम और सिंचाई विभाग के संयुक्त प्रयास से राजधानी के लगभग 110 घाटों पर छठ पूजा की व्यवस्था की जा रही है। हर घाट पर महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होगी और दिल्ली पुलिस के जवान भी मुस्तैद रहेंगे। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड ने घाटों पर स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए विशेष टैंकर भेजे हैं।
साथ ही, बिजली विभाग ने घाटों पर हाई-मास्ट लाइटें लगाने का काम शुरू कर दिया है ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के शाम और भोर के अर्घ्य दे सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि छठ पूजा के दौरान भीड़ को देखते हुए सभी जिलों के DM और SDM को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्वयं मौके पर निगरानी रखें।
CM रेखा गुप्ता का संदेश:
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में लाखों की संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं और उनके लिए छठ सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “हमारी सरकार हर समुदाय की परंपराओं का सम्मान करती है। छठ पूजा के अवसर पर हम सभी मिलकर दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग न करें और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पर्यावरण विभाग और एनजीओ के सहयोग से घाटों पर सफाई अभियान भी चलाया जाएगा।
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था:
दिल्ली पुलिस ने छठ पूजा के मद्देनज़र सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने घाटों के आसपास रूट डायवर्जन की जानकारी जारी की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यातायात विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें।
DTC और क्लस्टर बसों के विशेष रूट तय किए गए हैं जो घाटों तक लोगों को आसानी से पहुंचाएंगे। इसके अलावा मेट्रो सेवाओं में भी अतिरिक्त ट्रिप चलाने की तैयारी है।
स्वच्छता पर विशेष ध्यान:
NDMC और MCD के अधिकारियों ने बताया कि छठ पूजा से पहले सभी घाटों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा पूजा के बाद भी घाटों की सफाई के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “छठ पूजा हमारे पर्यावरण और नदियों के प्रति आस्था का प्रतीक है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पूजा के बाद कोई कचरा या प्लास्टिक यमुना में न जाए।”
जनता में उत्साह:
छठ महापर्व को लेकर दिल्ली के पूर्वांचल समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में पूजा सामग्री, बांस के सूप और दौरा की खरीदारी जोरों पर है। मिठाई की दुकानों और सब्जी मंडियों में भीड़ उमड़ रही है।
पूर्वी दिल्ली निवासी संजय पांडे ने कहा कि “दिल्ली सरकार द्वारा अवकाश घोषित करना बहुत सराहनीय कदम है। इससे लाखों लोग बिना किसी दफ्तर की चिंता के पूजा में शामिल हो पाएंगे।”
छठ पूजा का महत्व:
छठ महापर्व सूर्य भगवान और छठी मइया की उपासना का पर्व है। यह चार दिनों तक चलने वाला त्योहार होता है जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे प्रमुख अनुष्ठान शामिल हैं। श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
दिल्ली में इस पर्व का महत्व बढ़ता जा रहा है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं।
छठ पर्व के अवसर पर दिल्ली सरकार का यह फैसला राजधानी के लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। एक ओर श्रद्धालु जहां अपनी धार्मिक आस्था के साथ पर्व मनाने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं प्रशासन भी सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संदेश साफ है — “दिल्ली सबकी है, और यहां की परंपराएं सबकी साझा विरासत हैं।”

