नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दीपावली से पहले ही हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई है कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। खास तौर पर आनंद विहार, वजीरपुर, रोहिणी, आईटीओ और द्वारका जैसे इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदूषण न केवल सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ा रहा है बल्कि आंखों, गले और फेफड़ों पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
आनंद विहार में AQI 400 पार, हवा में घुला जहर
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार सुबह आनंद विहार इलाके में AQI 412 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में आता है। इस श्रेणी में आने का मतलब है कि हवा में मौजूद प्रदूषक कण न केवल संवेदनशील लोगों बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों पर भी सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। वजीरपुर और रोहिणी में भी AQI क्रमशः 397 और 385 तक पहुंच गया है। वहीं, द्वारका और मुंडका में 370 से अधिक का स्तर दर्ज किया गया। कई इलाकों में दृश्यता भी प्रभावित हुई है। सुबह और शाम के समय आसमान में धुंध की मोटी परत साफ दिखाई दे रही है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
AIIMS के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव भसीन के अनुसार, “AQI का 400 पार जाना बेहद गंभीर स्थिति है। यह स्तर फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।”
डॉ. भसीन ने बताया कि ऐसे हालात में सांस लेने की क्षमता घट जाती है, आंखों में जलन, सिरदर्द और थकान बढ़ जाती है।
सरकार ने उठाए एहतियाती कदम
दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण कार्यों पर पाबंदी, सड़क किनारे कचरा जलाने पर सख्त कार्रवाई और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने कहा, “हमने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाएं। इसके अलावा, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।”
वाहन प्रदूषण भी बढ़ा रहा परेशानी
दिल्ली की सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों की संख्या भी वायु प्रदूषण में अहम भूमिका निभा रही है। केंद्र सरकार के SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting And Research) के आंकड़ों के अनुसार, कुल प्रदूषण का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा वाहन उत्सर्जन से आता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि दिल्लीवासियों को अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए, कारपूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए और गैर-जरूरी यात्रा से बचना चाहिए।
पराली जलाने का असर भी दिखने लगा
हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में भी हाल के दिनों में इजाफा हुआ है। उपग्रह चित्रों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 1,800 से ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। हवा का रुख उत्तर-पश्चिम की ओर होने के कारण इन इलाकों से उठने वाला धुआं सीधे दिल्ली की ओर बढ़ रहा है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया है।
लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
प्रदूषण बढ़ने के कारण दिल्लीवासियों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 68 वर्षीय राजेश मेहरा कहते हैं, “सुबह टहलने निकलना मुश्किल हो गया है। आंखों में जलन होती है और सांस भारी लगती है।” वहीं बच्चों में खांसी और गले में दर्द के मामले भी बढ़ रहे हैं। दवाइयों की दुकानों पर एंटी-एलर्जी और इनहेलर की मांग बढ़ गई है। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि लोग N95 मास्क का इस्तेमाल करें और घर में एयर प्यूरीफायर चलाएं।
हवा साफ करने के प्रयास
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए वॉटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। करीब 500 से अधिक जगहों पर यह अभियान चलाया जा रहा है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे कचरा न जलाएं, पौधे लगाएं और अनावश्यक वाहनों का प्रयोग न करें।
क्या करें और क्या न करें
करें:
घर से निकलने से पहले AQI चेक करें
मास्क (N95) का इस्तेमाल करें
ज्यादा पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें
घर में एयर प्यूरीफायर या पौधे लगाएं
न करें:
सुबह-सुबह बाहर व्यायाम न करें
कचरा या लकड़ी न जलाएं
वाहन का इंजन बेवजह चालू न रखें
भविष्यवाणी और चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन दिनों में हवा की गति धीमी रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण स्तर में सुधार की उम्मीद कम है। यदि बारिश नहीं हुई, तो हवा की गुणवत्ता ‘Severe+’ श्रेणी में जा सकती है।
दिल्ली के नागरिकों से अपील की गई है कि वे खुद जागरूक रहें और प्रदूषण कम करने में प्रशासन की मदद करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सरकार का नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह शहर की हवा को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान दे।

