By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
झारखंड के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। WPC (World Powerlifting Congress) पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 में देवघर के खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित कर दिया। 14 जून 2026 को चास, बोकारो में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देवघर के तीन सदस्यीय दल ने अपनी असाधारण ताकत, तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न भार वर्गों में ऐतिहासिक सफलता हासिल की।

करीब 185 से अधिक एथलीटों की मौजूदगी वाली इस हाई-प्रोफाइल प्रतियोगिता में देवघर के खिलाड़ियों ने केवल पदक ही नहीं जीते बल्कि राज्य स्तर पर खेल संस्कृति के नए मानक भी स्थापित किए।
आयुष संतोषी बने प्रतियोगिता के सबसे बड़े सितारे
इस अभियान का नेतृत्व 19 वर्षीय उभरते पावरलिफ्टर और बेंच प्रेस विशेषज्ञ आयुष संतोषी ने किया। उन्होंने 67.5 किलोग्राम बेंच प्रेस वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया और इसके साथ ही आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अपना आधिकारिक चयन सुनिश्चित कर लिया।

लेकिन आयुष की उपलब्धि यहीं तक सीमित नहीं रही।
उन्होंने प्रतियोगिता के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘बेस्ट लिफ्टर – बेंच प्रेस (ओपन एज कैटेगरी)’ का खिताब भी अपने नाम किया। यह सम्मान प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ तकनीक, ताकत और प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस स्तर की उपलब्धि हासिल करना भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी संभावनाओं का संकेत है।
देवघर के अन्य खिलाड़ियों ने भी दिखाया दम
आयुष संतोषी के साथ देवघर से गए अन्य दो खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर अपनी जगह बनाई।

हरिज्योति दास ने जीता रजत पदक
60 किलोग्राम वर्ग में भाग लेते हुए हरिज्योति दास ने पावरलिफ्टिंग SBD (स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट) ओपन एज श्रेणी में राज्यभर के मजबूत खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी।
उनके संतुलित प्रदर्शन और तकनीकी मजबूती ने उन्हें प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान दिलाया।
सुजल सिंह ने हासिल किया तीसरा स्थान
56 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रहे सुजल सिंह ने अपनी उत्कृष्ट ‘पावर-टू-वेट’ क्षमता और मानसिक मजबूती का परिचय दिया।
कड़े मुकाबले के बीच उन्होंने SBD ओपन एज वर्ग में तृतीय स्थान प्राप्त कर देवघर की उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया।

देवघर को स्पोर्ट्स हब बनाने का आयुष का सपना
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद आयुष संतोषी ने अपने भविष्य के विज़न को साझा करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत पदक जीतना नहीं है। उनका सपना है कि देवघर को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से आगे बढ़ाकर झारखंड की अग्रणी स्पोर्ट्स सिटी और आधुनिक स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जाए। आयुष का मानना है कि देवघर और आसपास के क्षेत्रों में विश्वस्तरीय खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, लेकिन उन्हें उचित मंच, प्रशिक्षण और संसाधनों की आवश्यकता है।
उनका उद्देश्य ऐसा खेल वातावरण तैयार करना है जिससे स्थानीय खिलाड़ी सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच बना सकें।

पहले भी लगातार सफलता हासिल कर चुके हैं आयुष
यह उपलब्धि किसी एक दिन की सफलता नहीं बल्कि लंबे समय से जारी निरंतर मेहनत का परिणाम है।
2025 में जीते थे 7 स्वर्ण पदक
पिछले प्रतिस्पर्धी सत्र में आयुष ने क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। वैद्यनाथ धाम क्लासिक और झारखंड स्टेट चैंपियनशिप सहित कुल पांच प्रमुख आयोजनों में उन्होंने सात स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी।

प्रशासनिक स्तर पर भी मिला सम्मान
खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए आयुष को 15 अगस्त 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में देवघर के केकेएन स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा सम्मानित भी किया गया था। यह सम्मान उनके निरंतर प्रदर्शन और जिले के खेल विकास में योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया था।

कोच और परिवार को दिया सफलता का श्रेय
आयुष संतोषी वर्तमान में देवघर के ऐतिहासिक महावीर अखाड़ा और स्मार्ट जिम में प्रशिक्षण लेते हैं।
वे कोच राजेश रंजन और संजय सिंह के मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास करते हैं।
अपनी इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने प्रशिक्षकों, माता-पिता और पूरे परिवार के सहयोग को दिया।
आयुष ने कहा कि खेल में निरंतरता, अनुशासन और सकारात्मक मानसिकता ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
झारखंड के खेल परिदृश्य के लिए निर्णायक संकेत
खेल विश्लेषकों के अनुसार एक ही जिले के तीन खिलाड़ियों का WPC पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में अलग-अलग भार वर्गों में टॉप-3 पोडियम हासिल करना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि एक उभरती खेल संस्कृति का संकेत है। देवघर में यदि खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और अवसरों का विस्तार किया जाता है तो आने वाले वर्षों में यह जिला राष्ट्रीय स्तर के कई एथलीट तैयार कर सकता है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पूरे झारखंड में इन खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है और राज्य उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।
देवघर के इन युवा खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण, अनुशासन और सही दिशा में की गई मेहनत किसी भी क्षेत्र को नई पहचान दिला सकती है।

