
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में एक बार फिर हवा जहरीली हो गई है। राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है। कई जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालात और बिगड़ सकते हैं, क्योंकि अभी ठंड पूरी तरह से नहीं आई है और पराली जलाने का असर भी जारी है।
दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, शनिवार सुबह दिल्ली के आनंद विहार, आईटीओ, ओखला, रोहिणी और द्वारका जैसे इलाकों में AQI 420 से 460 के बीच रिकॉर्ड किया गया। वहीं गुरुग्राम और नोएडा में भी स्थिति बेहतर नहीं है, यहां का AQI क्रमशः 390 और 410 तक पहुंच गया।
हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सुरक्षित सीमा से 6 से 8 गुना तक ज्यादा पाई गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति यूं ही बनी रही तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पराली जलाने और मौसम का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के पीछे मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं, स्थानीय धूल, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक धुआं हैं।
मौसम विभाग ने बताया कि हवा की गति बहुत धीमी होने से प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही जमा हो रहे हैं। इस कारण प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है।
स्कूलों और निर्माण कार्यों पर असर
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। वहीं, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया गया है, जिसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल जेनरेटर के इस्तेमाल पर पाबंदी और ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे सख्त कदम उठाए गए हैं।
इंडिया गेट पर आज विरोध प्रदर्शन
प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए आज शाम इंडिया गेट पर सैकड़ों लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे। पर्यावरण संगठनों और नागरिक समूहों ने “#RightToCleanAir” अभियान के तहत यह प्रदर्शन आयोजित किया है। लोगों की मांग है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाएं।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा है गंभीर असर
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और आरएमएल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि प्रदूषण के कारण अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से बच्चों और बुजुर्गों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों ने लोगों को घर से कम निकलने, N95 मास्क पहनने, और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी है।
सरकार की पहल और भविष्य की चुनौतियाँ
दिल्ली सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए “ऑड-ईवन योजना” को फिर से लागू करने पर विचार शुरू कर दिया है। साथ ही, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक नीति बनानी होगी, जिसमें हरित क्षेत्र बढ़ाना, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण, और स्वच्छ ऊर्जा के प्रयोग पर जोर दिया जाए।
लोगों की आवाज़: ‘अब सांस लेना भी मुश्किल’
राजधानी के कई इलाकों में रहने वाले लोगों ने कहा कि सुबह की सैर और बच्चों को स्कूल भेजना अब चुनौती बन गया है। “हम सुबह खिड़की खोलते हैं तो धुंध नहीं, धुआं नजर आता है,” राजौरी गार्डन की निवासी सीमा गुप्ता ने बताया। वहीं, आईटी प्रोफेशनल रवि कुमार ने कहा, “AQI ऐप खोलने से डर लगता है, अब तो घर में भी सांस भारी महसूस होती है।”
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञ और IIT दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. अश्विनी कुमार का कहना है कि दिल्ली की हवा में PM 2.5 का स्तर 450 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जो कि WHO के मानक से लगभग 20 गुना अधिक है। “अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में दिल्ली रहने योग्य नहीं बचेगी,” उन्होंने चेतावनी दी।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का संकट केवल मौसम या पराली की समस्या नहीं, बल्कि एक सामूहिक असफलता का परिणाम है। सरकार, उद्योग, और आम नागरिक — सभी को मिलकर इस संकट से निपटना होगा। साफ हवा का अधिकार हर नागरिक का है और इसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।

