By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
एम्स दिल्ली में मिर्गी मरीजों को बड़ी राहत, अब महंगी जांचें नि:शुल्क
नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल AIIMS Delhi ने मिर्गी यानी एपिलेप्सी से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। अब एम्स दिल्ली में मिर्गी से जुड़ी कई महंगी जांचें नि:शुल्क की जाएंगी। इसके साथ ही मरीजों को बेहतर और व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराने के लिए नई स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

दरअसल, मिर्गी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मरीज को बार-बार दौरे पड़ते हैं। देश में लाखों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच और सही उपचार मिलने पर इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए महंगी जांचें और लंबा इलाज बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में एम्स दिल्ली की यह पहल हजारों मरीजों के लिए राहत लेकर आई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एम्स दिल्ली अब मिर्गी रोगियों के लिए एडवांस न्यूरोलॉजिकल जांच सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराएगा। इनमें वीडियो ईईजी मॉनिटरिंग जैसी जांचें भी शामिल हैं, जिनकी कीमत निजी अस्पतालों में हजारों रुपये तक होती है। इन जांचों की मदद से डॉक्टर मरीज की बीमारी की सही स्थिति को समझ सकेंगे और उसके अनुसार इलाज तय किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार सामान्य जांचों से मिर्गी की सटीक पहचान नहीं हो पाती। ऐसे में एडवांस जांच की जरूरत होती है, लेकिन महंगी लागत के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इसे कराने में असमर्थ रहते हैं। अब एम्स की नई व्यवस्था से ऐसे मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
एम्स प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों को “पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट” यानी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। हर मरीज की बीमारी की प्रकृति अलग होती है, इसलिए उसके अनुसार दवाइयों, जांच और उपचार की योजना बनाई जाएगी। इससे इलाज की सफलता दर बढ़ने की उम्मीद है।

जानकारों के मुताबिक मिर्गी के कई मरीज लंबे समय तक गलत दवा लेते रहते हैं, जिससे बीमारी नियंत्रित नहीं हो पाती। नई सुविधा के तहत विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज के दौरे के प्रकार, बीमारी के इतिहास और जांच रिपोर्ट के आधार पर सटीक उपचार योजना तैयार करेंगे।
एम्स दिल्ली में इस सुविधा के शुरू होने से देशभर से आने वाले मरीजों को फायदा मिलेगा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए एम्स पहुंचते हैं। ऐसे में नि:शुल्क जांच सुविधा गरीब परिवारों के लिए आर्थिक राहत साबित होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अब भी मिर्गी को लेकर जागरूकता की कमी है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे अंधविश्वास या मानसिक बीमारी से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। समय पर इलाज और सही दवाओं से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
एम्स दिल्ली की इस पहल का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को बेहतर जीवन देना भी है। अस्पताल में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से मरीजों की लगातार निगरानी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सर्जरी और अन्य उन्नत उपचार विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार मिर्गी के इलाज में सबसे अहम भूमिका सही डायग्नोसिस की होती है। यदि बीमारी के प्रकार का सही पता चल जाए तो मरीज को लंबे समय तक दौरे से राहत मिल सकती है। यही वजह है कि एम्स ने एडवांस जांचों को मुफ्त करने का निर्णय लिया है।
इस फैसले को देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी संस्थानों में यदि इस तरह की सुविधाएं बढ़ती हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

एम्स दिल्ली पहले से ही न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में देश का प्रमुख संस्थान माना जाता है। यहां देशभर से जटिल बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अब मिर्गी मरीजों के लिए नई सुविधाओं के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एम्स के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे न केवल मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।

मरीजों और उनके परिजनों को सलाह दी गई है कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हैं, अचानक बेहोशी आती है या शरीर में अनियंत्रित कंपन होता है, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और इलाज से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
एम्स दिल्ली की यह पहल देश के लाखों मिर्गी मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण मानी जा रही है। मुफ्त जांच और व्यक्तिगत उपचार जैसी सुविधाएं स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती हैं।

