दूरसंचार विभाग (DoT) ने देश में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सभी नए मोबाइल फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय आने वाले महीनों में बाजार में आने वाले हर स्मार्टफोन पर लागू होगा। फोन जब पहली बार सेटअप किया जाएगा, तो यह ऐप स्क्रीन पर दिखाई देगा और इसे न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इस कदम से मोबाइल फोन से जुड़े कई प्रकार के साइबर अपराध, फर्जी IMEI नंबर, फोन चोरी, और सेकंड-हैंड मोबाइल बाजार की धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।

क्यों जरूरी पड़ा ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य करना?
पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन की चोरी, सिम स्वैपिंग, डुप्लीकेट IMEI और फर्जी IMEI लगाकर बेचे जा रहे फोन जैसे मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, हर वर्ष लाखों यूजर्स अपने चोरी या खोए हुए मोबाइल फोन की शिकायत करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में उपभोक्ता सेकंड-हैंड मोबाइल खरीदकर धोखाधड़ी का शिकार भी बनते हैं।
सरकार का मानना है कि ‘संचार साथी’ ऐप इन समस्याओं को काफी हद तक रोकने में सक्षम है, क्योंकि यह उपभोक्ताओं को फोन चोरी होने पर उसे ब्लॉक कराने, डुप्लीकेट IMEI की पहचान करने, दूसरे हाथ के फोन का सत्यापन करने और संदिग्ध गतिविधियों से खुद को सुरक्षित रखने की सुविधाएँ देता है।
ऐप की मुख्य विशेषताएँ
1. CEIR (Central Equipment Identity Register) इंटीग्रेशन
इस ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता सीधे CEIR सिस्टम में अपने चोरी/गुम फोन की रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं। इससे फोन तुरंत ब्लॉक हो जाता है, जिससे उसका दुरुपयोग नहीं हो पाता।
2. डुप्लीकेट IMEI की पहचान
कई गिरोह चोरी के फोन में नकली IMEI डालकर उसे फिर से बेचते हैं। यह ऐप IMEI नंबर की वैधता की जांच करता है और किसी भी विसंगति की स्थिति में यूजर को अलर्ट करता है।
3. सेकंड-हैंड फोन की ‘ऑथेंटिसिटी चेक’
उपयोगकर्ता पुराना फोन खरीदने से पहले यह चेक कर सकेंगे कि वह फोन पहले चोरी, ब्लॉक या ब्लैकलिस्टेड तो नहीं रहा।
4. स्पैम व कॉल-सुरक्षा सुविधाएँ
ऐप संदिग्ध कॉल और संदेशों के बारे में जानकारी देता है, जिससे साइबर फ्रॉड का खतरा कम होता है।
5. यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस
फोन सेटअप के दौरान ऐप अपने आप दिखाई देगा और यूजर को सुरक्षा सुविधाओं को सक्रिय करने का विकल्प देगा।
ऐप को हटाना या डिसेबल करना क्यों नहीं होगा संभव?
दूरसंचार विभाग का कहना है कि यह एक “राष्ट्रीय सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण” से जुड़ा ऐप है। यदि इसे यूजर uninstall या disable कर पाता, तो इसका उद्देश्य अधूरा रह जाता।
इसीलिए, इसे सिस्टम-लेवल ऐप के रूप में प्री-इंस्टॉल किया जाएगा, ताकि इसकी सेवाएँ हमेशा एक्टीव रहें और मोबाइल नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण सुरक्षा जांच बिना बाधा के चलती रहें।
डिजिटल फ्रॉड पर कैसे लगेगी रोक?
भारत में ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल फोन से जुड़े अपराध कई बार बैंकिंग धोखाधड़ी, UPI फ्रॉड और पहचान चोरी तक ले जाते हैं।
‘संचार साथी’ ऐप के माध्यम से —
चोरी हुए डिवाइस तुरंत ब्लॉक होंगे
अपराधियों के लिए IMEI क्लोन करना मुश्किल होगा
सेकंड-हैंड बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी
संदिग्ध यूजेज की मॉनिटरिंग आसान होगी
इससे साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
मोबाइल कंपनियों पर क्या प्रभाव?
देश में बिकने वाले सभी ब्रांड — चाहे वह चीनी, कोरियन, अमेरिकी या भारतीय हों — अब अपने स्मार्टफोन सिस्टम ऐप्स की लिस्ट में ‘संचार साथी’ को जोड़ेंगे।
इसके लिए तकनीकी इंटीग्रेशन, ऐप अपडेट और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की प्रक्रिया अपनानी होगी। हालांकि यह प्रक्रिया कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं को क्या फायदा मिलेगा?
फोन चोरी होने पर तत्काल ब्लॉक की सुविधा
डुप्लीकेट/फर्जी IMEI से बचाव
पुराने फोन खरीदने में सुरक्षा
डिजिटल फ्रॉड से बेहतर सुरक्षा
सरकारी सत्यापित शिकायत प्रक्रिया
सरकार का कहना है कि इस कदम से मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण मिलेगा और लंबे समय में साइबर अपराध के बड़े गिरोहों पर रोक लगेगी।
भविष्य में और क्या बदलाव संभव?
दूरसंचार विभाग मोबाइल सुरक्षा, साइबर फ्रॉड रोकने और IMEI विनियमन को मजबूत करने के लिए आगे भी कई कदम उठाने की तैयारी में है।
संभावना है कि आने वाले समय में यह ऐप e-KYC सत्यापन, फोन की लोकेशन ट्रैकिंग और AI आधारित फ्रॉड अलर्ट जैसी सुविधाओं से और अधिक उन्नत हो सकता है।

