By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर: स्वच्छ और सुंदर शहर की पहचान को लेकर एक बार फिर देवघर में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो के सामने आने के बाद नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था और कर्मचारी नेतृत्व को लेकर बहस शुरू हो गई है। इस मामले में देवघर की महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि शहर की अस्मिता और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

महापौर ने अपने बयान में कहा कि उनके संज्ञान में सोशल मीडिया के माध्यम से एक ऐसा वीडियो आया है, जिसमें देवघर लोकल बॉडीज फेडरेशन के अध्यक्ष संजय मंडल कथित रूप से सफाईकर्मियों को सड़क पर कूड़ा फैलाने के लिए उकसाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर कहा गया कि “सड़क पर कूड़ा फेंको, कोई कुछ नहीं करेगा।” इस बयान को लेकर महापौर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर शहर में गंदगी फैलाने या व्यवस्था को बाधित करने का संदेश देता है, तो यह केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि जनता के विश्वास पर भी आघात है। देवघर धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाला शहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
महापौर ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी की पहचान स्वच्छता, व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी भी संगठन या व्यक्ति द्वारा कर्मचारियों को गैर-जिम्मेदाराना तरीके से प्रेरित करना निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने सफाईकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि नगर की स्वच्छता व्यवस्था में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सफाईकर्मी प्रतिदिन कठिन परिस्थितियों में काम कर शहर को साफ और व्यवस्थित बनाए रखते हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार के उकसावे या नकारात्मक नेतृत्व के प्रभाव में आने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों और शहर के सम्मान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

महापौर ने यह भी कहा कि विरोध और अपनी मांगों को उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, शहर की स्वच्छता व्यवस्था बाधित करना या नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी या संगठन की कोई मांग है तो उसके लिए प्रशासनिक और लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं।
मामले को गंभीर बताते हुए महापौर ने नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन से वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

महापौर ने देवघर के नागरिकों से भी अपील की कि वे शहर की स्वच्छता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ गतिविधियों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिशोध और राजनीतिक भावना के तहत यदि नगर व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है तो इसका नुकसान सीधे आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। नगर निगम और शहर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। वहीं शहर के लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

