
चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड: पहली बार ₹1.87 लाख/किलो के पार
देशभर में कीमती धातुओं के दाम में तेज उछाल जारी है। चांदी ने 11 दिसंबर को अपना ऑल-टाइम हाई बना दिया है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार चांदी ₹1,500 बढ़कर ₹1,86,988 प्रति किलो हो गई। इससे पहले यह ₹1,85,488/किलो थी।
इस साल चांदी में कुल ₹1,00,971 (117%) की उछाल दर्ज की गई है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है।
सोना भी चढ़ा तेजी से, ₹1.28 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा
सोने के दाम भी तेज रफ्तार में हैं। यह ₹747 बढ़कर ₹1,28,535 प्रति 10 ग्राम हो गया।
17 अक्टूबर को सोने ने अपना पुराना ऑल-टाइम हाई ₹1,30,874/10 ग्राम बनाया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में सोना और मजबूत हो सकता है।
शहरों में सोना–चांदी के दाम अलग क्यों होते हैं?
IBJA की कीमतें बेस रेट होती हैं। इनमें शामिल नहीं होते—
3% GST
मेकिंग चार्ज
ज्वेलर्स का मार्जिन
इसी वजह से अलग-अलग शहरों में दाम अलग दिखते हैं। कई बैंक जैसे PNB गोल्ड लोन के लिए IBJA रेट को ही आधार मानते हैं।
इस साल कितनी बढ़ोतरी हुई? (जनवरी–दिसंबर 2025)
सोना
31 दिसंबर 2024 की कीमत: ₹76,162 (24 कैरेट, 10 ग्राम)
वर्तमान कीमत: ₹1,28,535
कुल बढ़त: ₹52,373
चांदी
31 दिसंबर 2024 की कीमत: ₹86,017/किलो
वर्तमान कीमत: ₹1,86,988
कुल बढ़त: ₹1,00,971
चांदी इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? – 3 बड़े कारण
1. इंडस्ट्रियल यूज में तेजी
सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ कोस्मास मरिनाकिस के मुताबिक—
चांदी अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल रिसोर्स बन चुकी है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में इसकी भारी मांग है।
2. अमेरिका में टैरिफ का डर
डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों के चलते अमेरिका में चांदी पर टैरिफ लगने की आशंका है।
इससे वहां की कंपनियां पहले से ही चांदी का बड़ा स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमी हो गई है।
3. सप्लाई सुरक्षित करने की होड़
दुनियाभर की फैक्ट्रियां उत्पादन बाधित न हो इसलिए बड़ी मात्रा में चांदी की बुकिंग कर रही हैं।
सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
आगे क्या होगा? – अगले महीनों में कीमतों का रुझान
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का अनुमान—
सोना 1.35 लाख रुपये/10 ग्राम तक जा सकता है
चांदी 2 लाख रुपये/किलो का स्तर पार कर सकती है
जियो-पॉलिटिकल तनाव, कम ब्याज दरों और बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड से कीमतों में और तेजी की संभावना बनी हुई है।
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें। बाजार जोखिम के अधीन है, कीमतें समय-समय पर बदल सकती हैं।
