देवघर। महिलाओं को सशक्त बनाने एवं समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन के उद्देश्य से “हमारा संकल्प – सशक्त महिला, सशक्त झारखंड” अभियान के तहत बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुमंडल स्तरीय परीक्षा कार्यालय परिसर, देवघर में आयोजित हुआ, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला समूहों एवं आम नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना एवं महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना रहा। इस अवसर पर राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुँचाई गई।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में डीसीसी पीयूष सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) रवि कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद थे। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि डीसीसी पीयूष सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह समाज के लिए एक गंभीर अभिशाप है, जो न केवल बालिकाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलता है, बल्कि समाज और राज्य के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के कारण बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
बाल विवाह को जड़ से समाप्त करने का आह्वान
विशिष्ट अतिथि एसडीएम रवि कुमार ने कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं कानूनन अपराध होने के साथ-साथ सामाजिक चेतना की कमी का भी परिणाम हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाएं और बाल विवाह की किसी भी सूचना को प्रशासन तक तुरंत पहुंचाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन कानून के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी ही इस कुप्रथा को समाप्त कर सकती है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वरोजगार योजनाओं और सरकारी सहायता योजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। बताया गया कि जब तक महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं होंगी, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
इस अवसर पर सखी मंडल, स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने महिलाओं को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं के लिए संचालित प्रमुख योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना
मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना
उज्ज्वला योजना
आयुष्मान भारत योजना
इन योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा, महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
जनभागीदारी से ही संभव है बदलाव
अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड को बाल विवाह मुक्त और सामाजिक रूप से सशक्त राज्य बनाने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। केवल प्रशासनिक प्रयासों से ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही वास्तविक बदलाव संभव है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन मिलकर यदि जिम्मेदारी निभाएं, तो बाल विवाह जैसी कुरीतियों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान पोस्टर, बैनर और संवाद के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
समाज को दिया गया सकारात्मक संदेश
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बाल विवाह मुक्त झारखंड बनाने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन लगातार ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि समाज से कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सके।
यह अभियान न केवल महिलाओं और बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि झारखंड को सामाजिक रूप से मजबूत और विकसित राज्य बनाने की ओर भी एक सशक्त पहल है।
देवघर में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान का आयोजन, डीसीसी पीयूष सिंह व एसडीएम रवि कुमार ने महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर दिया जोर।

