By: Vikash, Mala Mandal
देवघर,झारखंड में बढ़ती बिजली दरों, लगातार हो रही बिजली कटौती और पोस्टपेड मीटर में कथित मनमानी बिलिंग के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। इसी कड़ी में देवघर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आम जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

यह आंदोलन झारखंड के सभी 24 प्रशासनिक जिलों में एक साथ आयोजित किया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि बिजली से जुड़ी समस्याएं राज्यव्यापी चिंता का विषय बन चुकी हैं। देवघर में हुए इस घेराव कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और आम नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बिजली दरों में लगातार वृद्धि और अनियमित आपूर्ति को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा केवल एक छलावा साबित हो रही है। उनका कहना है कि जैसे ही किसी उपभोक्ता की खपत 200 यूनिट से बढ़कर 201 यूनिट होती है, उसे पूरे यूनिट का बिल चुकाना पड़ता है, जिससे आम लोगों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। यह व्यवस्था न केवल अव्यवहारिक है बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत परेशानी का कारण बन रही है।

इसके अलावा, बिजली की अनियमित आपूर्ति को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती होने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। गर्मी के मौसम में बिजली की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां बिजली आपूर्ति पूरी तरह से अस्थिर बनी हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने पोस्टपेड मीटर में हो रही कथित गड़बड़ियों को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका आरोप है कि उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत से अधिक बिल थमाया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की है कि बिजली बिल में पारदर्शिता का अभाव है और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं किया जाता।
भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार को बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि बिजली दरों में वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए, 200 यूनिट मुफ्त बिजली की नीति को व्यवहारिक बनाया जाए, और पोस्टपेड मीटर की बिलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी किया जाए। साथ ही, नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन भी बिजली विभाग के अधिकारियों को सौंपा, जिसमें उपभोक्ताओं की समस्याओं और मांगों का विस्तृत उल्लेख किया गया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बिजली से जुड़ी समस्याएं अब असहनीय हो चुकी हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली बिल का बोझ उनके लिए अतिरिक्त परेशानी बन गया है। कई लोगों ने यह भी कहा कि बार-बार बिजली कटौती के कारण बच्चों की पढ़ाई और छोटे व्यवसायों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है कि बिजली व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा है। आने वाले समय में यदि इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह एक बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
देवघर में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक जिला स्तर का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे राज्य में बिजली व्यवस्था के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह होगा कि सरकार और बिजली विभाग इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

