By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: भारतीय मूल की NASA की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अपने भारत दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा कि उनका भारत आना “घर वापसी जैसा” महसूस होता है और उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि वह *चाँद पर जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पति उन्हें मार डालेंगे।” यह बयान सुनने वाले सभी के चेहरे पर मुस्कान लगा दी।

यह टिप्पणी उन्होंने न्यू दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर में बतौर मुख्य अतिथि आयोजित इंटरैक्शन सेशन में दी, जहां उन्होंने अपने 600 से अधिक दिनों के अंतरिक्ष अनुभव, भारत एवं अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए।
🇮🇳 भारत दौरा: “घर वापसी जैसा अनुभव”
विलियम्स ने कहा कि भारत आकर उन्हें ऐसा लगता है मानो वे घर वापस आ गईं हैं क्योंकि उनके पिता का जन्म भारत में हुआ था। उन्होंने देश का प्यार और स्वागत अनुभव करते हुए बताया कि वह भारत की ऊर्जा और युवा वैज्ञानिकों की अभिरुचि से प्रेरित महसूस कर रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष में होने पर भी उन्होंने पहली चीज़ जो देखी वह भारत थे — यह देश उनका “आत्मिक स्थान” होने के कारण उनके लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
चाँद की ओर अगली यात्रा और पति का मजाकिया जवाब
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भविष्य में चाँद की यात्रा करना चाहेंगी, तो सुनीता ने हँसते हुए कहा:
“मुझे चाँद पर जाना बहुत पसंद है, लेकिन मेरे पति मुझे मार डालेंगे!”
यह मजाकिया जवाब लोगों में चर्चा का विषय बन गया और दर्शकों ने दिल खोल कर तालियाँ बजाईं। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि “नई पीढ़ी” अंतरिक्ष के अगली चरणों का नेतृत्व करे और चंद्र मिशनों में भाग ले।

अंतरिक्ष में अनुभव और वैश्विक सहयोग का संदेश
सुनीता विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष मिशन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनका एक मिशन केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि मानवता की साझेदारी का प्रतीक रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण में वैश्विक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है और इसे लोकतांत्रिक रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
विलियम्स ने कहा कि जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर थीं, तो उन्होंने देखा कि सभी देशों के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री एक साथ मिलकर काम करते हैं। इससे उनका दृढ़ विश्वास बन गया कि भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।
NASA में उपलब्धियाँ और प्रेरणा
सुनीता विलियम्स NASA की उन चुनिंदा महिलाओं में से हैं जिन्होंने विशाल अंतरिक्ष यात्राओं में हिस्सा लिया है। उनके अंतरिक्ष अभियानों में कई रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनमें महिला अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सबसे अधिक समय तक EVA (pacewalk) शामिल है।
उन्होंने मिशनों के दौरान अनुभव की चुनौतियों, कठिन परिश्रम और टीम वर्क की अहमियत पर भी प्रकाश डाला। विलियम्स ने कहा कि किसी भी मिशन की सफलता केवल एक व्यक्ति की मेहनत नहीं बल्कि पूरी टीम, तकनीक और साझेदारी का परिणाम होती है।
🇮🇳 भारत को लेकर भावनाएँ और संपर्क
विलियम्स ने अपने भारत दौरे को “अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक” बताया और कहा कि वह भारत के युवा वैज्ञानिकों से मिलने और उनकी उर्जा को महसूस करने के लिए उत्साहित हैं।
उनका मानना है कि भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्पेस कार्यक्रम में वह अपना अनुभव साझा कर सहयोग भी प्रदान कर सकती हैं — खासकर ऐसे समय में जब भारत अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक रूप से बेचता और साझा करता है।

कल्पना चावला परिवार से मुलाक़ात
यात्रा के दौरान उन्होंने दिवंगत भारतीय मूल अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मां और बहन से दिल्ली में मुलाकात की। यह मुलाकात दोनों देशों के अंतरिक्ष इतिहास और भावनाओं का एक विशेष पल था।
कल्पना चावला के योगदान को स्मरण करते हुए सुनीता ने कहा कि चावला हमेशा उन्हें प्रेरित करती रही हैं और उन जैसी अंतरिक्ष यात्री बनने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
भविष्य के लिए संदेश
अपने संबोधन के अंत में सुनीता विलियम्स ने कहा कि अंतरिक्ष सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धियाँ नहीं बल्कि मानवता का साझा प्रयास है. उन्होंने भारत के युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया कि वे आगे आएं और भविष्य के चाँद और मंगल अभियानों का नेतृत्व करें।
उनका भारत दौरा देश और NASA के बीच वैज्ञानिक और भावनात्मक पुल का प्रतीक बन गया है — एक घर वापसी और एक भविष्य की साझेदारी दोनों का संदेश।

