By: Vikash Kumar (Vicky)
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत के लिए एलपीजी से भरे दो टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पिछले कुछ समय से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान द्वारा कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों में भारत के लिए तेल और गैस लेकर आने वाले जहाज भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे माहौल में ईरान द्वारा भारतीय टैंकरों को ग्रीन सिग्नल देना भारत के लिए राहत की खबर है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से रोजाना दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। खाड़ी देशों से भारत आने वाले अधिकतर तेल और गैस के जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में अगर यहां तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकरों को ईरान ने सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया है। इसके बाद ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हुए भारत की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता के लिए सकारात्मक कदम बताया है।

दरअसल हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ गया था। ईरान ने कुछ जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले भी किए थे। इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के मार्ग बदल दिए थे। इससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था।

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी की आपूर्ति भी इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर होती है। इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समुद्री मार्ग में बाधा आती है तो इसका असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है और सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। भारतीय सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय दोनों ही इस मामले में सक्रिय हैं। जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना भी इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात की जा सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इसमें अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाना, रणनीतिक तेल भंडार बनाना और एलपीजी सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।

